रुड़की के आदर्श शिवाजी निवासी शहीद मानसिंह गुसाईं के बेटे उम्मेद सिंह और दो बेटिया ममता और कविता उस समय बहुत छोटे थे जब उनके पिता कारगिल में दुश्मनों का मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हो गए।
पिता की यादों के सहारे जीवन की कठिन डगर पर आगे बढ़ रहे तीनों बच्चों को अपने पिता के जज्बे पर नाज है।
दोनों बहनों की पढ़ाई लिखाई के साथ ही बीमार मां की जिम्मेदारी संभालने वाले उम्मेद सिंह ने बीकॉम तक पढ़ाई पूरी कर ली है और वे एक काबिल सीए बनना चाहते हैं।
उनकी इच्छा तो वैसे फौज में जाकर पिता की तरह जांबाज सैनिक बनने की थी लेकिन परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी के चलते वह ऐसा नहीं कर सके।