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भाजपा ने दिया था उत्तराखंड सीएम बनने का ऑफर : नैथानी

Sun, 16 Oct 2016 09:41 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मंत्री प्रसाद नैथानी - फोटो : file photo
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कांग्रेस से निष्कासन के बाद निर्दलीय के तौर पर वर्ष 2012 में चुनाव जीतकर कांग्रेस सरकार को समर्थन की बात हो या फिर 2016 में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सहित नौ विधायकों की पार्टी से बगावत के बाद बने हालात, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिव फ्रंट (पीडीएफ) के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी कांग्रेस सरकार के लिए संकट मोचक की भूमिका में रहे।
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बावजूद इसके वे पहले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की आंख में खटकते रहे और अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के निशाने पर हैँ। कांग्रेस संगठन और पीडीएफ के बीच आरोप-प्रत्यारोपों में घिरे पीडीएफ अध्यक्ष का कहना है कि वर्ष 2012 में उन्हें भाजपा से उप मुख्यमंत्री और पीडीएफ सदस्यों को मंत्री बनने का आफर था, लेकिन सतपाल महाराज के कहने पर कांग्रेस के समर्थन में आए।

वर्ष 2016 में सियासी घटनाक्रम के दौरान नैथानी भाजपा से मुख्यमंत्री बनाने के ऑफर की बात कहते हैं। इस बीच महाराज के भाजपा में आने के बाद भी वे गठबंधन धर्म निभाने की बात करते हैं। अब 2017 के चुनाव आने वाले हैं ऐसे में उनका मानना है कि अब कांग्रेस अपना वायदा पूरा करे। उन्होंने साफ कर दिया है कि कुछ भी हो वह हर हाल में देवप्रयाग विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। अमर उजाला के संवाददाता बिशन सिंह बोरा के साथ पीडीएफ अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री की ऐसे ही तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई।    
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पिछले चुनाव में कांग्रेस ने आपका टिकट काटा, छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया, जब निर्दलीय जीत गए तो कांग्रेस सरकार से चिपक गए, आखिर ऐसा मोह क्यों? 
- मैंने कभी सत्ता की राजनीति नहीं की, शहीदों के सपनों को साकार कर राज्य की प्रगति को आगे बढ़ाया जा सके इसलिए समर्थन दिया।
 
आप भाजपा नेता सतपाल महाराज के नजदीकी माने जाते हैं, लेकिन जब भाजपा को समर्थन न देने की बात आई तो आपने पाला बदल लिया?
-मैं महाराज का सम्मान करता हूं, मैने पाला नहीं बदला, हम तो आज भी अपने पाले में हैं। वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बनी सियासी समीकरणों के बाद महाराज ने कहा था कांग्रेस को समर्थन दो। वर्ष 2012 में उन्हें भाजपा से उप मुख्यमंत्री और पीडीएफ सदस्यों को मंत्री बनने का आफर था। मार्च 2016 के ताजा सियासी घटनाक्रम के दौरान भाजपा से मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर भी मिला था, लेकिन मैंने गठबंधन धर्म निभाया। 
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सीनियर लीडरशिप की बात को पूरा किया है

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी - फोटो : getty images
आगामी 2017 के विस चुनाव में आप कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे या फिर आपके समर्थन में कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उतारेगी। सरकार को समर्थन के बदले इन दोनों में से किस पर करार हुआ है?  
-2012 में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी, गुलाम नवी आजाद, अमित पटेल ने कहा था 2017 में आपके लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं, आप कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें या फिर यदि आप निर्दलीय जहां कही से भी चुनाव लड़ते हैं तो वहा कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी। आपके जिन साथियों ने आपको जिताया, उन्हें टच नहीं करेंगे, वे संगठन में बने रहेंगे, लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने उनके ब्लॉक अध्यक्षों को हटाने का काम किया, इससे अच्छा संदेश नहीं गया। 

देवप्रयाग से यदि कांग्रेस शूरवीर सजवाण को टिकट देती है तो आप क्या करेंगे?
-हमसे कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप की जो बात हुई थी हमने उसे पूरा किया है। अब कांग्रेस तय करे उसे क्या करना है, मैं तो देवप्रयाग से चुनाव लडूंगा, कांग्रेस से टिकट का प्रस्ताव आया तो उस पर विचार किया जाएगा। 

यह मिथक है कि प्रदेश में जो भी शिक्षा मंत्री बना वे दुबारा चुनाव नहीं जीता। फिर आपने क्यों शिक्षा विभाग लिया?
-विपरीत परिस्थितियों में काम करने की मेरी फितरत रही है, इस बार यह मिथक जरूर टूटेगा, देवप्रयाग क्षेत्र की जनता व शिक्षक इस मिथक को तोड़ेंगे। 

शिक्षा विभाग में बगैर पैसों के कोई काम नहीं होता?
- एकदम गलत है, पहले की सरकारों में विभाग को व्यवसायिक प्रतिष्ठान बना दिया गया था, बगैर पैसों के तबादले और प्रमोशन नहीं होते थे। मैने इस तरह की स्थिति को जड़ से साफ कर दिया। तबादलों में कोई पक्षपात नहीं हुआ, मैने यह देखा जहां जो योग्य है उसे वहां भेजा जाए, शासन के प्रस्ताव पर कुछ संशोधन किया, जहां जो गलत हो गया है उसे संशोधित कर ठीक किया जाएगा। 
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ये भी हैं सवाल...

मंत्री प्रसाद नैथानी - फोटो : अमरउजाला
खंडूड़ी सरकार ने शिक्षकों के पारदर्शी तबादलों के लिए एक्ट बनाया, लेकिन तबादलों में मनमानी के लिए आपने नियमावली बना दी?
-खंडूड़ी का एक्ट गलत नहीं था, इसमें कुछ स्थितियां उतनी अनुरूप नहीं थी, खुद शिक्षकों ने भी इसका विरोध किया। हमने जो नियमावली बनाई उसे हाईकोर्ट ने भी सही माना है। 

क्या कारण है कि सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, पिछले साढ़े चार सालों में 1800 से अधिक स्कूल खाली हो गए ?
-जगह-जगह स्कूल खुलने और बढ़ता पलायन इसकी वजह है, दैवी आपदा के चलते लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए और गांव खाली होने से स्कूलों में छात्र संख्या न के बराबर रह गई। अब हमने 500 मॉडल स्कूल खोले हैं।

शिक्षा विभाग में आप अपने रिश्तेदारों को नियम विरुद्ध सुगम स्कूलों में ले आए?
-कोई ऐसा एक केस बता दे कि मैने नियमविरुद्ध ऐसा किया है मैं राजनीति छोड़ दूंगा।
  
चर्चा है कि पूर्व शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन और आपके बीच बनी नहीं। आपके कहने पर उन्हें हटाया गया?
-पांडियन खुद मेरी पसंद पर शिक्षा विभाग में आए, मैंने जो भी आदेश किए उन्होंने उसे किया। कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के दबाव में उन्हें हटाया गया। 

बसपा आगामी चुनाव में अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने जा रही है ऐसे में गठबंधन तो खत्म हो गया ?
-पीडीएफ दल नहीं लोकतांत्रिक गठबंधन है। बीएफपी, यूकेडी कोई भी चुनाव अपने दम पर लड़े किसी पर रोक नहीं है। यह तो सरकार को चलाने का फार्मूला था। 
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