तबादला नियमावली संशोधित हुए बगैर प्रदेश में हुए 159 शिक्षकों के तबादले मुख्यमंत्री द्वारा निरस्त किए जाने के आदेश से शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी असहमत हैं। उन्होंने इसे गलत बताया है।
ये तबादले पहले शिक्षा मंत्री के अनुमोदन पर ही हुए थे। महीनों बाद शिक्षा मंत्री की टीस सामने आई है। मंत्री ने कहा कि तबादले उचित थे, लेकिन शिक्षक संगठन की मांग पर इन तबादलों को निरस्त कर दिया गया।
बीते साल अगस्त माह में शिक्षा मंत्री के अनुमोदन पर अपर मुख्य सचिव एस राजू ने प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों के 159 शिक्षकों के तबादले कर दिए थे। इसमें पौड़ी, टिहरी और चमोली के दुर्गम विद्यालयों में से 72 शिक्षकों के तबादले देहरादून किए गए थे।
नियमावली संशोधित हुए बगैर तबादलों में शिक्षक संगठनों ने मनमानी का आरोप लगाया था। इसमें कुछ ऐसे शिक्षक भी शामिल थे, जिनके नाम बगैर आवेदन के ही तबादला सूची में शामिल थे। 26 अगस्त को अमर उजाला में खुलासे के बाद प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन की मांग पर दो दिन बाद मुख्यमंत्री ने इन तबादलों को निरस्त कर दिया था।
मुख्यमंत्री ने तबादले रुकवा दिए
शुक्रवार को जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने उन शिक्षकों के तबादलों का अनुमोदन किया था, जिसमें कई दिल के रोगी, कैंसर पीड़ित थे, लेकिन शिक्षक संगठनों के कहने पर मुख्यमंत्री ने तबादले रुकवा दिए।
इससे पहले संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौहान ने कहा कि विधायक हीरा सिंह बिष्ट का संगठन को सहयोग मिलता रहा है। विधायक के एक प्रयास से ही मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर अमल करते हुए तबादले रुकवा दिए थे।
इन तबादलों को सही ठहरा रहे शिक्षा मंत्री
नाम-----------------कार्यरत---------तबादला------------------कारण
1- नीलम आर्या------बागेश्वर---------दून शहरी क्षेत्र---------पति उत्तराखंड शासन में कार्यरत हैं।
2 - रेखा बिष्ट---------कर्णप्रयाग------दून-------------------पति सरकारी सेवा में दून में कार्यरत हैं
3- रेखा कांडपाल------अल्मोड़ा---------ऊधमसिंह नगर------पति के गृह जनपद में तबादला चाहिए
4- रेखा पेटवाल-------टिहरी---------दून------------------पति के दून में राजकीय सेवा में होने के कारण
5- संगीता तिवारी------अल्मोड़ा---------हरिद्वार---------पति के ऋषिकेश में कार्यरत होने के कारण
ये तो कुछ ही मामले हैं, इस तरह के कई नाम सूची में थे, जिसके तबादले के आदेश किए गए थे।
नेताओं जैसी हुई शिक्षकों की छवि
शिक्षकों की छवि लगातार खराब हो रही है। जिस तरह नेताओं को देखकर लोग गलत कहते हैं, शिक्षकों को भी कुछ वैसे ही नजरिये से देखा जाने लगा है। जैसे सभी नेता खराब नहीं होते, वैसे ही सभी शिक्षक भी गलत नहीं हैं, लेकिन चंद शिक्षकों की वजह से पूरा शिक्षक समुदाय बदनाम हो रहा है।
(जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के शपथ ग्रहण समारोह में शिक्षा मंत्री का बयान)
साथी कह रहे विभाग छोड़ दो, मैं रणछोड़ नहीं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिसे चुनाव में हराना हो उसे शिक्षा मंत्री बना दो, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है मेरे साथी कहने लगे हैं कि विभाग छोड़ दो, लेकिन मैं रणछोड़ने वाला नहीं हूं।
शिक्षा की गुणवत्ता तीन साल में नहीं सुधरी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल से वे शिक्षा विभाग का जिम्मा देख रहे हैं, लेकिन शिक्षा गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाया है।
दुर्गम का अच्छा सुगम का रिजल्ट है खराब
दुर्गम का रिजल्ट अच्छा है, लेकिन सुगम स्कूलों का खराब है। शिशु मंदिरों की तरह शिक्षक स्कूल में ही नहीं बल्कि घर-घर जाकर बच्चों पर ध्यान दें।
शिक्षक संघ का आर-पार की लड़ाई का किया ऐलान
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने घोषणा के तीन महीने बाद भी उनकी मांगों पर अमल न होने पर नाराजगी जताते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। संघ के प्रांतीय महामंत्री डा.रणवीर सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री को यह अंतिम स्मरण पत्र है, इसके बाद संगठन उन्हें कभी कोई मांग पत्र नहीं देगा और सीधे सड़कों पर उतर आएगा।