मुरादाबाद, बिजनौर इलाके में दिसंबर-जनवरी में कई लोगों को मारने वाली आदमखोर बाघिन रहस्यमय ढंग से ‘लापता’ हो गई है।
यूपी फारेस्ट डिपार्टमेंट बाघिन के कार्बेट पार्क पहुंचने की बात कह रहा है तो कार्बेट पार्क प्रबंधन के पास आदमखोर बाघिन के ‘ठिकाने’ तक पहुंचने के साक्ष्य नहीं है।
आदमखोर बाघिन के बारे में जंगलात के अफसरों का मानना था कि वह कार्बेट पार्क से निकल कर यूपी के आबादी वाले इलाके में पहुंच गई थी।
बाद में यूपी की टीम, शिकारी और ग्रामीण बाघिन को मारने निकले। इसके बाद में दावा किया गया कि बाघिन कार्बेट पार्क लौट रही है, बाघिन की आखिरी लोकेशन यूपी के अमानगढ़-जसपुर के बीच मिली थी।
उत्तराखंड के जंगलात ने की आवश्यक तैयारी
बाघिन को लेकर उत्तराखंड के जंगलात ने आवश्यक तैयारी की। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के सहयोग से यूपी-उत्तराखंड के जंगल की सीमा पर कैमरा ट्रैप भी लगाए।
पर लंबे समय से बाघिन की कोई सूचना नहीं है। वह एक तरीके से गुम हो गई है।
कार्बेट पार्क ने कैमरा ट्रैप लगाए थे उसमें कई टाइगरों की फोटो आई हैं। पर इसके आधार पर कोई भी अधिकारी दावा करने को तैयार नहीं कि इसमें से कोई भी आदमखोर बाघिन होगी।
कार्बेट पार्क के अधिकारियों के अनुसार सटीक पुष्टि तभी हो सकती है कि जब यूपी की तरफ से कोई आदमखोर बाघिन की फोटो (इसमें बाघिन के धारियों से मिलान किया जाता है, धारी के आधार पर सटीक पहचान होती) मिली होती।
कार्बेट जाते हुए देखे गए बाघिन के पद चिन्ह
यूपी के वन महकमे के पास केवल बाघिन के फूट प्रिंट के तौर पर ही साक्ष्य हैं न की फोटो के तौर पर। ऐसे में कार्बेट पार्क के अपने ठिकाने में पहुंचने का कोई पक्का दावा नहीं किया जा सकता।
कार्बेट पार्क निदेशक समीर सिन्हा का कहना है कि कैमरा ट्रैप में कुछ टाइगर के फोटो आए हैं, पर इनके आधार पर दावा नहीं किया जा सकता है कि इसमें कोई आदमखोर बाघिन है।
मुख्य वन संरक्षक बरेली एमपी सिंह का कहना है कि बाघिन ने जहां अंतिम शिकार किया था वहां से उसके पद चिन्ह कार्बेट पार्क की तरफ जाते हुए देखे गए थे।
इसके बाद से कोई भी घटना नहीं हुई है। ऐसे में संभावना है कि कार्बेट पार्क में बाघिन पहुंच गई होगी।