मलेथा में आंदोलनकारियों और ग्रामीणों पर पुलिस लाठीचार्ज के आरोपी कीर्तिनगर कोतवाल और दारोगा को सरकार ने हटा दिया है। दोनों को हटाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी समीर रतूड़ी ने छह जून से जल त्याग दिया था।
बृहस्पतिवार को सीएम के आश्वासन के बाद शुक्रवार को प्रशासन ने कार्रवाई की। वहीं प्रशासन ने मलेथा में बृहस्पतिवार को जाम लगाने के आरोप में कई आंदोलनकारियों के खिलाफ नामजद और अज्ञात रिपोर्ट दर्ज की है।
स्टोन क्रशरों के विरोध में मलेथा के ग्रामीण करीब 11 माह से आंदोलित हैं। छह जून को आमरण अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को पुलिस ने उठा लिया था। हेमंती नेगी को अनशन से उठाने के समीर रतूड़ी और ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट आमरण अनशन पर बैठ गए।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि हेमंती नेगी को उठाने आई पुलिस ने ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया। इस घटना के विरोध में समीर रतूड़ी ने छह जून से जल त्याग दिया।
सीएम के आश्वासन पर समीर ने किया जलग्रहण
बृहस्पतिवार देर शाम मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों को फोन पर कीर्तिनगर कोतवाल व लाठीचार्ज के आरोपी दारोगा को हटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलनकारी रतूड़ी ने बृहस्पतिवार को जल ग्रहण कर लिया।
शुक्रवार सुबह कोतवाल एएस रावत और दारोगा राम सिंह गुसाईं स्थानांतरण आदेश मिलने पर कार्यमुक्त हो गए। उधर, पुलिस ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के आरोप में 10 ग्रामीणों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है।
इसके अलावा करीब 50 अज्ञात के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया गया है कि रतूड़ी और ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट का आमरण अनशन जारी है। उन्होंने स्टोन क्रशरों के बंद होने के आदेश जारी होने के बाद ही अनशन तोड़ने की बात कही है।
दंडात्मक कार्रवाई हुई या पुरस्कार
कोतवाल एएस रावत का स्थानांतरण मुनिकीरेती व दरोगा राम सिंह गुसाईं का तबादला आगराखाल चौकी में किया गया है। दोनों स्थान देहरादून के नजदीक है।
सूत्रों के अनुसार कोतवाल रावत व दारोगा गुसाईं का घर देहरादून में है। गुसाईं एक माह पहले ही देहरादून से कीर्तिनगर आए थे। ऐसे में दोनों का देहरादून के नजदीक तबादलों को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय लाठीचार्ज का पुरस्कार माना जा रहा है।
बिष्ट का वजन दो किलो गिरा
छह जून से अनशन पर बैठे ग्राम प्रधान शूरवीर बिष्ट का वजन दो किलो गिर गया है। वहीं समीर रतूड़ी ने शुक्रवार को भी अपना स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराने दिया। उनकी मांग है कि कीर्तिनगर के चिकित्सकों के बजाय श्रीनगर के चिकित्सक उनका स्वास्थ्य परीक्षण करें।