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संगीत के सात सुरों की कहानी, पं. राजन-साजन मिश्र की जुबानी

Sat, 13 Jun 2015 02:47 AM IST
जितेंद्र पपनै/अमर उजाला, रामनगर
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बनारस घराने से ताल्लुक रखने वाले संगीतकार और पद्मभूषण से सम्मानित पंडित राजन और साजन मिश्र का मानना है कि जैसे मनुष्य का शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से मिलकर बना है, वैसे ही संगीत के सात सुर ‘सारेगामापाधानी’ पशु-पक्षियों की आवाज से लिए गए हैं।
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प्रथम सुर षडज मोर से, दूसरा सुर ऋषभ यानी बैल से, तीसरा सुर गंधार गधे से, चौथा सुर मध्यम बकरी से, पांचवां सुर पंचम कोयल से, छठा सुर धैवत मेंढक से एवं सातवां निषाद हाथी की चिंघाड़ से लिया गया है। उनका कहना है कि हर चीज प्रकृति से ही बनी है, जब हम इसे सुरक्षित रखेंगे तभी हम भी सुरक्षित रहेंगे।

अमर उजाला से की दिल की बात
अमर उजाला से बातचीत में कार्बेट पार्क भ्रमण पर आए संगीतकार बंधु पंडित राजन-साजन ने कहा कि प्रकृति ही अहंकार को खत्म कर सकती है। प्रकृति को नजदीक से निहारने पर आनंद की अनुभूति होती है।
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कुदरत के साथ बैठने से निखरता है संगीत

पहाड़, पेड़-पौधों, नदियों के साथ ही वन्य जीवों को देखते ही हम स्वयं को बहुत छोटा महसूस करने लगते हैं। तभी हमारा अहंकार खत्म हो जाता है और हमें आनंद का अनुभव प्राप्त होता है।

शास्त्रीय संगीत के लिए देश-विदेश में प्रख्यात पंडित राजन-साजन ने कहा कि प्रकृति से जो शांति मिलती है, वह और कहीं नहीं मिलती। इसलिए हम यहां पार्क में साल में दो बार शांति के लिए आते हैं।

उन्होंने कहा आज के आपाधापी के माहौल में कोई संगीतकार प्रकृति के माहौल में बैठता है तो उसकी संगीत के बारे में सोचने की आत्म क्षमता बढ़ती है, जो संगीतकार के लिए बहुत जरूरी है।
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फंड से नहीं सोच से गंगा होगी साफ

गंगा की गोद में पले-बढ़े पंडित राजन, साजन ने गंगा मैली होने के सवाल पर कहा कि गंगा को साफ रखने के लिए सबसे पहले फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे को रोकना होगा। उन्होंने कहा गंगा फंड से नहीं सोच से बदली जा सकती है।

'आपदा के लिए प्रकृति नहीं हम जिम्मेदार'
इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को मानसिकता बदलनी होगी। उत्तराखंड में आई आपदा के लिए प्रकृति जिम्मेदार नहीं, बल्कि हम स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा गंगा को स्वच्छ रखने के लिए शिक्षा हर घर में होनी चाहिए।

पॉलीथिन भारत से ही बंद होनी चाहिए। गंगा में मोटर वोट डीजल के बदले बैटरी चालित होनी चाहिए। गंगा सफाई प्रधानमंत्री राजीव गांधी, मनमोहन सिंह ने भी शुरू की थी, अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। गंगा तभी साफ होगी, जब हम मानसिकता बदलेंगे। उन्होंने बताया कि कार्बेट पार्क में बाघ और हाथियों का झुंड देखकर उन्हें अच्छा लगा।
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