मकर संक्रांति पर इस बार श्रद्धालुओं को देवप्रयाग, हरिद्वार में डुबकी लगाने के लिए भरपूर गंगा जल मिलेगा।
220 क्यूमेक्स पानी छोड़ा
पर्व को देखते हुए टिहरी बांध प्रशासन ने सोमवार से ही झील से 220 क्यूमेक्स पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। वहीं बारिश न होने के कारण भागीरथी और भिलंगना के गिरते जल स्तर के कारण बांध प्रशासन संभल-संभल कर कदम रख रहा है।
मकर संक्रांति पर देवप्रयाग, हरिद्वार, प्रयागराज इलाहाबाद और गंगा सागर समेत कई तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान की परंपरा है। माना जाता है कि गंगा स्नान से मोक्ष और शुभ फल मिलता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान तो कुंभ की बैशाखी के बराबर माना गया है।
जल स्तर में काफी गिरावट
इस बार कम बारिश होने के कारण नदियों के जल स्तर में भी काफी गिरावट आई है। सोमवार को भागीरथी का जल स्तर 55 क्यूमेक्स और भिलंगना में मात्र 11 क्यूमेक्स पानी दर्ज किया गया। सोमवार को बांध प्रशासन ने टिहरी बांध झील से 220 क्यूमेक्स पानी छोड़ना शुरू कर दिया ताकि समय पर पानी देवप्रयाग, हरिद्वार, इलाहाबाद आदि स्थानों पर पहुंच सके और श्रद्धालु स्नान कर सकें।
21 दिसंबर से हो गई थी शुरुआत
समय पर पानी इलाहाबाद तक पहुंच जाए इसके लिए 21 दिसंबर से ही झील से पानी बढ़ाया जाने लगा था। 21 दिसंबर को झील से 160 क्यूमेक्स तो 25 दिसंबर से 200 क्यूमेक्स पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया था। अब 13 जनवरी से सभी घाटों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए इसे बढ़ाकर 220 क्यूमेक्स कर दिया गया है।