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सूर्योदय के बाद होगा मकर संक्रांति का स्नान

Mon, 13 Jan 2014 07:31 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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मकर संक्रांति और उत्तरायणी के अवसर पर देश के अनेक पर्वतीय भागों से गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हैं।
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सूर्योदय के साथ ही स्नान शुरू हो जाएगा और उत्तरायणी पर्व मनाते हुए श्रद्धालु मकर के सूर्य को अर्घ्य प्रदान करेंगे। दिनभर यज्ञोपवीत संस्कार, मुंडन आदि शुभ कर्म कराए जाएंगे।

सूर्योदय के बाद ही स्नान का महत्व
सूर्योदय से पूर्व भगवान भास्कर धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रविष्ट हो जाएंगे। सूर्योदय के समय अधिकांश श्रद्धालु अर्घ्य प्रदान करते हुए गंगा स्नान करेंगे। यूं तो हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान सूर्योदय से पहले भी होता आया है किंतु मकरस्थ सूर्य के दर्शन के लिए श्रद्धालु सूर्योदय के बाद ही गंगा तट पर पहुंचेंगे।
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हरकी पैड़ी के अलावा सर्वाधिक भीड़ कुशावर्त घाट पर रहेगी जहां हजारों पर्वतवासी यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराएंगे। कुशा घाट, नाई घाट आदि सहित कईं घाटों पर मुंडन संस्कार भी संपन्न होंगे। उत्तरायणी स्नान के लिए जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के सर्वाधिक संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हुआ है।

विशेष रूप से कुमाऊं मंडल के यात्रियों की भीड़ अधिक नजर आ रही है। स्नान के लिए यूपी और दिल्ली से भी खासी संख्या में श्रद्धालु मंगलवार को हरिद्वार आएंगे।

मध्याह्न काल में अनेक जगह खिचड़ी भोजों का आयोजन किया जा रहा है। उत्तरी हरिद्वार और कनखल के मठों, अखाड़ों तथा आश्रमों के साथ-साथ सामूहिक रूप से मोहल्लावासियों ने भी ऐसे भोज आयोजित किए हैं। इन भोजों में खिचड़ी के साथ-साथ तिल से बने मिष्ठान भी परोसे जाएंगे।

ठंड का सीना चीर कर उगेंगे मकर के सूर्य
शरद ऋतु का सीना चीर कर मकर के सूर्य मंगलवार को सवेरे 7:14 बजे उगेंगे। सिंह से मकर राशि में संक्रमण उससे पूर्व 6:44 पर हो चुका होगा। सूर्य के मकरस्था होने पर मंगलवार को जहां गांगेय नगरों में लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। मान्यता के अनुसार इसी दिन से तिल-तिल कर ठंड घटनी शुरू हो जाएगी।
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सूर्य देव सोमवार को दक्षिणायन के चरम पर होंगे। मंगलवार की सवेरे से छह महीने चलने वाले उत्तरायण यात्रा प्रारंभ हो रही है। उत्तरायणी को धर्मशास्त्रों में पवित्रतम दिन बताया गया है। इस दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय हो जाता है। मकर के सूर्य ज्योतिषीय एवं शास्त्रीय दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं। दूसरे क्रम पर मेष के सूर्य आते हैं।
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