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खतरे में महात्मा गांधी की निशानी, बचाने में जुटा वन विभाग

Wed, 19 Sep 2018 01:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Ficus tree
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महात्मा गांधी द्वारा राजधानी दून के शहंशाही के पास मसीही ध्यान केंद्र परिसर में 17 अक्तूबर 1929 को रोपे गए पीपल के वृक्ष पर बीमारी ने हमला बोल दिया है।

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किसी पर्यावरण प्रेमी ने प्रकरण की जांच प्रमुख वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष जयराज को दी, तो उन्होंने विभागीय टीम को मौके पर भेज पीपल की जांच कराई।

प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि बीमारी की गिरफ्त में आए पीपल का ट्रीटमेंट कराया जाएगा।
 

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ट्रीटमेंट करके पेड़ को बीमारी से बचाया जा सकता है

mahatma gandhi
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने 1929 में देहरादून प्रवास के दौरान पीपल का पौधा लगाया था। जो 89 साल बाद भारी भरकम वृक्ष में तब्दील हो चुका है। लेकिन, इस पेड़ पर बीमारी ने हमला बोल दिया है। पेड़ पर जाले लग गए हैं, जो पेड़ को खराब कर रहे हैं।

दूसरी ओर पीपल के पेड़ की पिछले 30 साल से देखभाल कर रहे माली रामयश का कहना है कि पहले वह पेड़ की छंटाई कर दिया करता था। लेकिन अब उम्रदराज होने की वजह से पेड़ पर नहीं चढ़ पाता।

ऐसे में वह देखभाल नहीं कर पा रहा है। माली रामयश का कहना है कि ट्रीटमेंट करके पेड़ को बीमारी से बचाया जा सकता है। 
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