भगवान शिव के विवाह में सिर्फ देव ही नहीं दानव, किन्नर, गंधर्व, भूत, पिशाच भी शामिल हुए थे। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को गंगाजल, दूध, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से स्नान करवाया जाता है।
फिर चंदन लगाकर फल-फूल, बेलपत्र, धतूरा, बेर इत्यादि अर्पित किए जाते हैं। रात की प्रथम प्रहर की पूजा 7.26 मिनट से शुरू होगी। निशिता काल की पूजा का समय रात 12. 59 मिनट से 1.47 मिनट तक रहेगी।
वैज्ञानिक दृष्टि से महाशिवरात्रि की रात बहुत विशेष होती है। दरअसल इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस तरह अवस्थित होता है कि इंसान के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक तौर पर ऊपर की तरफ बढ़ने लगती है।
यानी प्रकृति खुद ही मानव को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में सहायता करती है। इसका पूरा फायदा लोगों को तभी प्राप्त हो सकता है, जब महाशिवरात्रि की रात में जागरण किया जाए।
इस बार 101 साल बाद महाशिवरात्रि पर विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. रमेश सेमवाल ने बताया कि फाल्गुण कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को संसार के कल्याण के लिए शिवलिंग प्रकट हुआ था।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव और शक्ति का विवाह भी महाशिवरात्रि को हुआ था। अब 101 साल बाद महाशिवरात्रि पर विशेष योग बन रहा है।
11 मार्च को महाशिवरात्रि को व्रत और पूजन किया जाना सर्वोत्तम है। शिवलिंग का पंचोपचार पूजन और रात्रि जागरण विशेष फलदायी होता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना कई गुना अधिक फल देती है।
- पं. उदय शंकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा