शनिवार को चूंकि प्रश्नकाल नहीं होना था, लिहाजा सदन कार्यवाही कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के साथ हुई। कार्यस्थगन के बाद सरकार ने अनुदान मांगों को पास कराने के जतन शुरू किए। ट्रेजरी बेंच को उम्मीद थी कि विपक्ष में बैठे नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन और गोविंद सिंह कुंजवाल पटकथा के अनुरूप किरदार निभाएंगे।
लेकिन सियासी हलचल के बीच विपक्ष ने एक के बाद एक अनुदान मांग पर चर्चाएं शुरू की। भोजनावकाश के बाद कार्यमंत्रणा बैठक हुई और उसके बाद विपक्ष का अंदाज बदल गया। अनुदान मांगें फटाफट पास होती गईं और स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांग पर कोविड के मुद्दे पर विपक्षी सदस्य वेल में चले गए और इसके बाद सीन पूरी तरह से बदल गया।
गैरसैंण में कोई टिकना नहीं चाहता, इस बात से मैं सहमत नहीं हूं। सरकार कामकाज पूरा करने के लिए 10 दिन के सत्र करने का इरादा किया था। लेकिन भराड़ीसैँण में सत्र ज्यादा अवधि तक संचालित हुआ। जिससे ज्यादा दिन का काम कम दिन में पूरा हो गया। इसलिए सत्र पहले स्थगित हो गया।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री
हम तो चाहते हैं कि सत्र सोमवार को भी चले। लेकिन सरकार की मंशा सोमवार को सत्र चलाने की नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमवार का दिन मुख्यमंत्री का होता है। मुख्यमंत्री के पास कई अहम विभाग हैं, जिनके संबंध में सदस्यों को सवाल पूछने का मौका नहीं मिलता।
- काजी निजामुद्दीन, कांग्रेस विधायक