केदारनाथ धाम की दलदली भूमि, हिमपात और सड़क मार्ग से दूरी को देखते हुए कॉटेज निर्माण में हल्की ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है।
यह ईंट इतनी हल्की हैं कि पानी में भी तैर सकती हैं। इसलिए इनको मैजिक ब्रिक कहा जाता है। प्रदेश शासन ने निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी और गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को धाम से करीब 400 मीटर पहले हट्स और काटेज बनाने का जिम्मा दिया गया है।
जहां जीएमवीएन प्री फेब्रिकेटेड हट्स का निर्माण कर रही है। वहीं निम मैजिक ब्रिक (ईंट) का इस्तेमाल कर रही है। निम ऐसा केदारनाथ की विषम भौगोलिक परिस्थति को देखते हुए कर रही है। केदारनाथ की जमीन में दलदली होने के साथ ही यहां दिसंबर से अप्रैल माह तक भारी बर्फबारी होती है।