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केदारनाथ धाम को आपदा से बचाएगी 'जादुई ईंट'

Sun, 12 Oct 2014 04:20 PM IST
संदीप थपलियाल/ अमर उजाला, केदारनाथ
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केदारनाथ धाम की दलदली भूमि, हिमपात और सड़क मार्ग से दूरी को देखते हुए कॉटेज निर्माण में हल्की ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है।
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यह ईंट इतनी हल्की हैं कि पानी में भी तैर सकती हैं। इसलिए इनको मैजिक ब्रिक कहा जाता है। प्रदेश शासन ने निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी और गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को धाम से करीब 400 मीटर पहले हट्स और काटेज बनाने का जिम्मा दिया गया है।

जहां जीएमवीएन प्री फेब्रिकेटेड हट्स का निर्माण कर रही है। वहीं निम मैजिक ब्रिक (ईंट) का इस्तेमाल कर रही है। निम ऐसा केदारनाथ की विषम भौगोलिक परिस्थति को देखते हुए कर रही है। केदारनाथ की जमीन में दलदली होने के साथ ही यहां दिसंबर से अप्रैल माह तक भारी बर्फबारी होती है।
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धाम में भारी भवन निर्माण उचित नहीं

जीएसआई ने भी माना है कि धाम की भूमि भारी स्ट्रक्चर के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे में हल्की ईंट से निर्माण कार्य किया जा रहा है। धाम में निर्माण कार्य करवा रहे उत्तम गुसाईं ने बताया कि निम लैट्रीन-बाथरूम युक्त दो कमरों की 50 यूनिट का निर्माण कर रही है।

एक यूनिट में दो कॉटेज हैं। धाम में भारी भवन निर्माण उचित नहीं है। इन सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैजिक ब्रिक खरीदी गई। उन्होंने बताया कि यह ईंट बहुत ही हल्की हैं और इनको चिपकाने में मसाला भी कम लगता है।

मैजिक ब्रिक में विशेष प्रकार की सीमेंट, एल्युमिनियम और कार्बन का प्रयोग होता है। इसलिए यह सामान्य ईंट की तुलना में कम वजन की है।

मैजिक ब्रिक की लागत
22 ईंच लंबी, नौ ईंच ऊंची और आठ ईंच चौड़ी मैजिक ब्रिक का वजन सिर्फ चार किलोग्राम है। हालांकि यह अन्य ईंटों की तुलना में थोड़ी महंगी है। देहरादून में एक ईंट 175 रुपए की है। केदारनाथ में इसकी लागत 600 रुपए तक पहुंच जाती है।
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