फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैगी बंद तो डगमगाया दून का फेमस मैगी प्वाइंट

Mon, 01 Jun 2015 11:21 AM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
बस दो मिनट मैगी नूडल्स का क्रेज बीते कुछ सालों में इतना अधिक बढ़ा कि दुकानदारों के रोजगार का साधन बन गया। राजधानी देहरादून की मसूरी रोड पर दुकानें खुलीं और मैगी मिलने के कारण जगह मैगी प्वाइंट के नाम से मशहूर हो गई। हर शाम यहां मैगी खाने वालों की भीड़ रहती है।
विज्ञापन


मगर मैगी की गिरती साख से अब मैगी प्वाइंट के दुकानदारों का व्यवसाय भी डगमगाने लगा है। हालांकि यप्पी, वाई-वाई, इटओप को मैगी के विकल्प के रूप में दुकानदार परोस रहे हैं, लेकिन मैगी के शौकीनों को यह रास नहीं आ रहा। इस कारण मैगी प्वाइंट पर लोगों की भीड़ भी कम होती जा रही है।

20 साल से मैगी से चल रहा परिवार
मसूरी रोड पर बीते 20 साल से दुकान चला रहे मोहन ममगाईं ने बताया कि मैगी से उनके परिवार की गुजर बसर हो रही है। करीब 20 साल पहले उनको इसका तनिक भी अंदाजा नहीं था कि मैगी उनका रोजगार बन जाएगी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि वे मैगी के बारे में जानते भी नहीं थे और न ही बनानी आती थी। उस समय कुछ पर्यटक यहां आए थे, वे अपने साथ मैगी लाएं। उन्होंने बनाने को कहा, लेकिन उनके बनाना नहीं आने की बात कहने पर पर्यटकों ने उनको मैगी बनाना सिखाया।

बीते 15 साल में मैगी का क्रेज बहुत बढ़ गया है। इसे देखते हुए उन्होंने अपने भाई को भी मैगी प्वाइंट खोलने की सलाह दी और उसका काम भी अच्छा चलने लगा।

मोहन ममगाईं ने कहा कि मैगी पर लगे प्रतिबंध ने हमारे लिए संकट खड़ा दिया है। जहां दिन में डेढ़ सौ ग्राहक आते थे आज मुश्किल से 30-40 लोग आ रहे है। लेकिन यह सच है कि बीस साल पहले वे जो मैगी बनाते थे और आज जो बनाते हैं, उसकी क्वालिटी में बहुत फर्क आ गया है।

अब मैगी बनाना ही बंद कर दिया है। इसकेबदले इटओप, वाई-वाई और यप्पी बनाते है। यह बिल्कुल मैगी की ही तरह होते है। लोग मैगी प्वाइंट में मैगी ही खाने आते है और नहीं मिलती तो सीधे चले जाते। ग्राहकों का आना बिल्कुल कम हो गया था। इसलिए मैंने यह तरीका ढूंढा।
- सवेंद्र सिंह, मैगी प्वाइंट

पिछले पंद्रह साल से मैगी प्वाइंट चला रही हूं। बीच में कई बार मैगी पर प्रतिबंध लगने की खबर आई, लेकिन इतना असर नहीं पड़ा, जितना अब पड़ रहा है। अपने बच्चों को भी मैगी नहीं खिला रही है, तो लोगों से कैसे उम्मीद करूं कि वो यहां आकर मैगी खाएं। इससे नुकसान बहुत हो रहा है।
विज्ञापन

- मधु सिंह, मैगी प्वाइंट मसूरी डायवर्जन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें