शंकराचार्यों के समकक्ष महिला संतों के पार्वत्याचार्य पद की 2009 में सर्जना कर इतिहास रचने वाली जगविख्यात मां योग शक्ति का शनिवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया में निधन हो गया।
मां का अंतिम संस्कार वहीं के श्मशान घाट पर वैदिक नियमों के अनुसार किया गया। योग शक्ति के जाने से महिला संतों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली एक शक्ति का अंत हो गया है।
योग के क्षेत्र में प्रख्यात मां योग शक्ति ने अपना मूल नाम ही योग को समर्पित कर दिया था। छह अप्रैल 1927 में जन्मीं योग शक्ति ने 89 वर्ष की आयु में प्राण छोड़े। वह उस कोटि के संतों में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिका को योगमय बनाया। आज अमेरिका में करीब 10 हजार योग केंद्र चल रहे हैं।
अमेरिका के न्यूयार्क, वाशिंगटन, शिकागो, कैलिफोर्निया आदि कईं शहरों में उनके आश्रम और योग केंद्र विद्यमान हैं। हरिद्वार, मुंबई, कोलकत्ता, अहमदाबाद, चेन्नई, दिल्ली आदि कई शहरों में मां द्वारा स्थापित सेवा केंद्र चल रहे हैं। उनके हरिद्वार के कनखल स्थित आश्रम में मां के निधन की खबर से शोक की लहर दौड़ गई।
योग शक्तिपीठ के सचिव अवधेश शर्मा एवं कोषाध्यक्ष इंद्रमोहन मिश्रा ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने 2009 में कनखल में एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन कर ज्योतिषानंद को पहली पार्वत्याचार्य घोषित कर दिया।
तब उन्हें पुरुष संतों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। जगद्गुरु शंकराचार्यों की चार पीठों की भांति महिला संतों के लिए पार्वत्याचार्यों की चार पीठों की स्थापना उनके मन में ही रह गई।