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मोहिनी रूप धर नंदा ने दैत्यों को छकाया

Sun, 24 Aug 2014 12:48 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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हरियाली ही हरियाली और उसके बीच से कैलास जाने का मार्ग जिसपर मायके से सजी संवरी नंदा ससुराल जा रही है, लेकिन रास्ते में कई दैत्य आकर मां नंदा का मार्ग रोक देते हैं।
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यही नहीं नंदा के सौंदर्य को देख वे उनपर मोहित हो जाते हैं। तब यहां शिव अपने गण माल को भेजते हैं। माल और मां नंदा कई रूप धारण कर दैत्यों को छकाकर आगे बढ़ जाती है।

इस पौराणिक किवदंती को जीवंत किया श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा के दौरान घतौड़ा गांव के मल्ल युद्ध ने। बताया जाता है कि मां नंदा के पीछे भागते हुए दैत्य घतौड़ा गांव से एक किमी दूर तालाब में थे।
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राजजात यात्रा पांचवें पड़ाव कोटी से छठवें पड़ाव भगोती की ओर आगे बढ़ती है। यहां से करीब तीन किमी खड़ी चढ़ाई पार कर घतौड़ा गांव है जो मां नंदा के कैलास यात्रा के दौरान दैत्यों द्वारा मां नंदा को अपने कब्जे में रखने की किवदंती का गवाह है।
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रूप जाल में फंस आपस में ही लड़े दैत्य

ग्रामीण जगदीश सती, बलवंत सिंह पंवार, पूर्ण सिंह कोटियाल, लक्ष्मण सिंह आदि का कहना है कि दैत्यों द्वारा देवी को परेशान करना और बाद में शिव के गण माल के प्रकट होने का प्रतीक यहां खेत में एक टीलानुमा आकार है।

यह न मिट्टी है और न पत्थर, जिसकी पूजा केवल राजजात यात्रा के यहां पहुंचने पर की जाती है और यात्रा के दौरान यहां छंतोली पहुंचने पर युद्ध शुरू होता है।

ग्रामीणों की मानें तो कैलास जाते वक्त दैत्य देवी के रूप पर मोहित हो गए थे जिस पर देवी ने कई रूप धारण किए। नंदा के सुंदर रूपों को अपनाने के लिए दैत्य आपस में ही लड़ बैठे और नंदा कैलास के लिए रवाना हो गई।

शनिवार को घतौड़ा के टीलानुमा स्थान पर कुछ ऐसा ही हुआ। इस कौथीग (मेले) को देखने के लिए यहां सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसके बाद नंदा की छांतोली सहित अन्य छंतोलियों की पूजा अर्चना के बाद यात्रा नौलपानी होते हुए भगोती के लिए आगे बढ़ जाती है।
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