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2014 की शुरुआत में ही 'बरसे' शुभ संकेत

Wed, 01 Jan 2014 11:28 AM IST
अमर उजाला, गढ़वाल
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उत्तराखंड में बर्फ और बारिश से नए साल की शुरुआत होना बेहद शुभ संकेत दे रहे हैं। सैलानी व अन्नदाताओं के चेहरे दमक उठे हैं।
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अपने साथ कई उम्मीदें भी लाया नया साल
आपदा के दर्द से जूझ रहे लोगों को भी कुदरत की दयानतदारी से मुस्कुराने का मौका मिला। बीते साल की मायूसियों को बिसारकर यह साल अपने साथ कई उम्मीदें भी लाया है।

सरकार और शासन की ओर से भी नूतन वर्ष के अवसर पर कई सकारात्मक घोषणाएं की गई हैं। प्रदेश के लिए वर्ष 2014 शुभ, सुरक्षित और सुंदर रहेगा, इसकी हम कामना कर सकते हैं।
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नए साल का जश्न मनाने के लिए पर्यटक उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। गुजडूगढ़ी एवं दीबागढ़ी की चोटियों में हुई बर्फबारी से पर्यटकों ने इस ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में उमड़ते हैं पर्यटक
जश्न मनाने के लिए क्षेत्र के जड़ाऊखांद, धुमाकोट, गुजडूगढ़ी, दीबागढ़ी, बूंगीदेवी, सल्ड महादेव, भौनदेवी, देवीढौंर, लिस्कोट, अदालीखाल, किनगोडीखाल, रसियामहादेव, बिनसर महादेव आदि पर्यटन स्थलों पर हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक उमड़ते हैं।

स्थानीय लोग, स्कूल कॉलेज के विद्यार्थी, नव विवाहित जोडे़ भी यहां के मंदिरों, शिवालयों एवं अन्य पर्यटन स्थलों पर पहुंचकर नए साल का स्वागत कर एक दूसरे को बधाई देते हैं। दूसरी ओर हिम क्रीड़ा स्थली औली में बर्फबारी होने से दिल्ली और दूसरे स्थानों से यहां पर्यटक पहुंचे हैं।

हालांकि पिछले वर्षों के मुकाबले उनकी संख्या काफी कम है। इसकी वजह इस वर्ष आपदा से खस्ताहाल हुई सड़कें और अब तक बर्फबारी न होना भी है। औली पहुंचे गुड़गांव निवासी शिवानी और नीरज का कहना है कि यहां थर्टी फर्स्ट मनाने का कार्यक्रम दो माह पहले बनाया था।

मन को सुकून मिला
30 दिसंबर की शाम को औली में बर्फ न देख हम मायूस हो गए थे। 31 दिसंबर को यहां हिमपात होने से हमने बर्फ का खूब लुत्फ उठाया। दिल्ली से सपरिवार यहां पहुंची साक्षी ने कहा कि नेट पर औली के बारे में पढ़ा। यहां आकर मन को सुकून मिल रहा है।

स्थानीय निवासी जयदीप रावत का कहना है कि औली और अन्य चोटियां 31 दिसंबर को हुई बर्फबारी से धवल हो उठी। इसके बाद यहां पर्यटकों का आना भी शुरू हुआ। धनोल्टी में बर्फबारी होने से वहां काफी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं।

उत्तरकाशी जिले के हर्षिल, चौरंगी सहित कई स्थानों पर बर्फबारी तो हुई है, लेकिन पर्यटक कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह खराब सड़कें और वर्ष के आखिरी दिन बर्फबारी होना है। अगर पहले बर्फबारी होती तो शायद स्थानीय स्तर पर कुछ पर्यटक पर्यटन स्थलों की ओर रुख करते।

देवाल प्रतिनिधि के अनुसार नववर्ष के स्वागत के लिए लोहाजंग, वाण और ग्वालदम में काफी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं। इस दौरान यहां पर्यटन, वन एवं लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस बुक हैं।

रोपवे से नहीं कर पाए औली का दीदार
थर्टी फर्स्ट का जश्न मनाने प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा स्थली औली जाने वाले पर्यटकों को जोशीमठ-औली रोपवे ने निराश किया। दो वर्षों से खराब रोपवे को अब तक भी ठीक नहीं किया गया है। ऐसे में पर्यटक अपने-अपने वाहनों से ही औली पहुंचे।
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दिल्ली के राहुल जैन और मुकुल का कहना है कि रोपवे खराब होने से उन्हें वाहन से ही औली जाना पड़ा। जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा का कहना है कि रोपवे 25 दिसंबर को चालू हो गई थी। लेकिन पुन: लाइटिंग में दिक्कत आने से रोपवे बंद हो गई है। शीघ्र ही रोपवे को चालू कर दिया जाएगा।
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