उत्तराखंड में अघोषित पावर कट से तमाम औद्योगिक इकाइयों को तगड़ा झटका लग रहा है।
उत्पादों की गुणवत्ता पर भी असर
कुछ दिन से लगातार जारी घंटों की कटौती से सैकड़ों उद्यमी नुकसान झेल रहे हैं, जबकि उत्पादों की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ रहा है।
उद्यमियों के अनुसार किसी भी प्रोसेसिंग यूनिट को उत्पादन से पहले गर्म करने के लिए कम से कम एक घंटे का वक्त लगता है। इस बीच बिजली चली जाए तो वक्त बढ़ता जाता है।
इससे जहां काम का वक्त खराब होता है, वहीं पैसे की बर्बादी भी होती है। उनके मुताबिक विदेशों को प्रोडक्ट निर्यात करने वाली यूनिटों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बिजली गुल रहने से समय से काम पूरा न होने पर कई बार आर्डर तक कैंसल हो जाते हैं।
कब कितनी कटौती
30 मई: साढ़े तीन घंटे
29 मई: पांच घंटे
28 मई: दो घंटे
(यह आंकड़ा दून के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र का है)
सेलाकुई के साथ ही हरिद्वार और पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र में भी बिजली कटौती हो रही है। एसोसिएशन पहले भी ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक से शिकायत कर चुकी है। अब भी समुचित बिजली आपूर्ति नहीं हुई तो मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
- अनिल मारवाह, महासचिव प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
गर्मियों में लोड बढ़ने पर ट्रांसफार्मरों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। ट्रांसफार्मरों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए अलग-अलग फीडर से कुछ समय के लिए कटौती की जा रही है। सेलाकुई में नया सब स्टेशन बन रहा है। जल्द ही बिजली कटौती की समस्या दूर हो जाएगी।
- मधुसूदन, प्रवक्ता ऊर्जा निगम