चुनाव परिणाम अभी नहीं आए हैं, लेकिन प्रदेश से कौन मंत्री बनेगा, सुगबुगाहट शुरू हो गयी है।
माना जा रहा है कि परिणाम भाजपा के पक्ष में आए तो मंत्रीपद दिलाने में रामदेव की भूमिका भी अहम होगी।
एक प्रमुख दल संतों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली ले जाने की तैयारियों में भी जुट गया है।
परिणाम से पूर्व ही एक प्रत्याशी ने तो कुछ प्रमुख संतों से इस संबंध में बातचीत भी की है।
कांग्रेस की राजनीति पर भी संतों का दखल
गौरतलब है कि भाजपा ही नहीं अपितु कांग्रेस की राजनीति पर भी हरिद्वार के संतों का दखल रहा है।
जहां तक भाजपा का सवाल है, कईं संत इस पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़े हैं और जीते हैं।
इनमें चिन्मयानंद सरस्वती, आचार्य जगदीश मुनि, स्वामी यतीन्द्रानंद आदि प्रमुख हैं। इन्हें टिकट दिलाने में मुख्य भूमिका वरिष्ठ संतों की ही रही है।
हाल में डॉ. निशंक को प्रत्याशी बनवाने में बाबा रामदेव का एकतरफा वीटो काम आया।
प्रत्याशियों द्वारा संतों को टटोलने का काम शुरू
संत सूत्रों के अनुसार, यह मानकर कि प्रदेश की पांचों सीटें भाजपा की झोली में जा रही हैं, कुछ प्रत्याशियों ने संतों को टटोलने का काम शुरू कर दिया है।
एक प्रत्याशी तो इस संबंध में बकायदा कुछ प्रमुख संतों से बातचीत भी कर चुका है।
योजना है कि परिणाम आते ही कुछ प्रमुख संतों को दिल्ली भेजकर आलाकमान पर दबाव बनाया जाये। अतीत में भी ऐसा हुआ है।
चुनाव परिणाम आने से पूर्व ही जिस प्रकार संतों की खोज-खबर राजनीतिक दल और प्रत्याशियों द्वारा ली जाने लगी है उससे साफ है कि प्रदेश से किसी को मंत्री पद दिलाने में हरिद्वार के संतों की भूमिका खास रहेगी।