इन जिलों में हैं इतने पूर्व सैनिक
अल्मोड़ा में 9,577, बागेश्वर में 7,837, चमोली में 11,059, चंपावत में 3,694, देहरादून में 29,444, हरिद्वार में 5,458, लैंसडौन में 15,080, पौड़ी में 6,756, नैनीताल में 13,569, पिथौरागढ़ में 18,149, रुद्रप्रयाग में 3,593, टिहरी में 5,143, ऊधमसिंहनगर 8,847 और उत्तरकाशी में 1157 पूर्व सैनिक हैं।
वीर नारियां एवं सैनिक विधवाएं
प्रदेश के अल्मोड़ा जिले में 4,835, बागेश्वर में 3,788, चमोली में 4,876, चंपावत में 1,364, देहरादून में 5,475, हरिद्वार में 1,040, लैंसडौन में 5,598, पौड़ी में 3,250, नैनीताल में 3,885, पिथौरागढ़ में 8,571, रुद्रप्रयाग में 1,740, टिहरी में 2,109, ऊधमसिंहनगर में 2,725 एवं उत्तरकाशी में 279 वीर नारी एवं विधवाएं हैं।
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अग्निवीर एक अच्छी योजना है। इससे सेना का पेंशन बजट कम होगा। -मेजर जनरल सीबी गुप्ता (सेनि)
सेना में भर्ती होने के चार साल बाद 75 प्रतिशत जवानों को बेरोजगार नहीं किया जाना चाहिए। यह सेना के प्रशिक्षित जवान हैं, इन्हें अर्द्धसैनिक बलों या अन्य फोर्स में समायोजित किया जाना चाहिए। -सूबेदार मेजर राजेंद्र प्रसाद (सेनि)