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भगवान बदरीनाथ ही दिखाएं धाम की राह!

Wed, 22 Apr 2015 02:22 AM IST
विजय बमोला/अमर उजाला, बदरीनाथ
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बदरीनाथ मंदिर के कपाट 26 अप्रैल को खुल रहे हैं। लेकिन जो हाल है, उसमें तीर्थयात्रियों, स्थानीय लोगों के साथ इंतजामकारों को भी भगवान बदरीनाथ का ही सहारा होगा। धाम तक पहुंचने की सबसे बड़ी चुनौती बदरीनाथ हाईवे है।
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जोशीमठ के पास मारवाड़ी में ढाई दिनों तक ठप रहा हाईवे मंगलवार शाम को छोटे वाहनों के लिए खुल सका। यहां मलबे के साथ मार्ग पर बड़ी चट्टान आ गई थी। अब भी यहां पहाड़ी से पत्थर छिटक रहे हैं। यात्रा मार्ग पर पसरे बड़े-बड़े हिमखंड अब तक पूरी तरह नहीं हट पाए हैं। धाम से दो किमी पहले कंचनगंगा में पसरे हिमखंड काटने के बाद फिर हाईवे पर आ रहे हैं।

कंचन गंगा में मुख्य मोड़ पर करीब 90 फीट ऊंचा हिमखंड है। बीआरओ की पांच मशीनें 40 फीट हिमखंड काट चुकी हैं। अंतिम समय में जिला प्रशासन ने जेपी कंपनी की भी मदद ली। यदि कंपनी के अधिकारियों से दस दिन पहले ही बात की जाती तो आज तक धाम तक हाईवे खुल गया होता।
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हाईवे पर लामबगड़ जैसे भूस्खलन जोन इस बार भी यात्रियों की परीक्षा लेंगे। लामबगड़ में थोड़ी सी बारिश होने पर भी पहाड़ी से मलबा हाईवे पर आ जाता है।
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धाम में बर्फ के नीचे दबी हैं दुकानें

हर यात्रा में पहुंचने वाले बामणी गांव समेत कई इलाके के दुकानदार अब तक धाम तक नहीं पहुंच पाए हैं। दुकानें बर्फ के नीचे दबी हैं। पहुंचने पर उन्हें ढूंढना पड़ रहा है। दुकानों के आगे दो-दो फीट बर्फ जमी है।

हाल यह है कि धाम में अब तक एक भी होटल नहीं खुला है। बर्फ जल्द नहीं हटी या पिघली तो यात्रियों को इस बार खाने-पीने के लिए भटकना पड़ सकता है।

बैंक और पोस्ट ऑफिस के बाहर जमी बर्फ नहीं हटी है। इस बार बर्फ के चलते दुधारू पशुओं को भी बदरीनाथ तक पहुंचाना ग्रामीणों के सामने चुनौती बनी है। मौसम बार-बार रंग बदल रहा है। हालांकि, सोमवार को बारिश के बाद मंगलवार को मौसम ठीक रहा। राहत की बात है कि धाम में बिजली, पेयजल और संचार व्यवस्था बहाल हो गई है।

दिक्कतें और भी
पांडुकेश्वर, गोविंदघाट, लामबगड़ और हनुमानचट्टी
जैसे पड़ावों पर अब तक पेयजल व्यवस्था नहीं
यात्रा पड़ावों पर कहीं भी अस्थायी शौचालय नहीं बने
हाईवे के डैंजर जोन पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं।

इनका है कहना
कंचनगंगा में पिछले दस सालों में पहली बार इतना बड़ा हिमखंड आया है। कंचनगंगा मोड़ पर करीब 90 फीट तक हिमखंड आया है। अभी तक 40 फीट हिमखंड हटा लिया गया है। चार दिनों से हिमखंड काटने के लिए पांच मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन अभी तक हाईवे का कोई पता नहीं चल पा रहा है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक यहां पर यात्राकाल में एक जेसीबी और डोजर मौजूद रहेगा।  जब तक यहां पर स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक यह परेशानी का सबब बना रहेगा।
-रूपज्योति दास, कमान अधिकारी, बीआरओ, पीपलकोटी।
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