असहिष्णुता के खिलाफ पुरस्कार और अलंकार वापिस करने वाले साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और फिल्मकारों को उत्तराखंड के अधिकतर साहित्यकारों ने भी समर्थन दिया है।
उत्तराखंड के साहित्यकार, रचनाकार, संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी और अन्य प्रबुद्धजनों ने एकजुटता दिखाते हुए संवेदना संस्था के आह्वान पर गांधी पार्क में धरना देकर असहिष्णुता के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। गांधी पार्क में धरना देकर संवेदना संस्था ने संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना को खंडित करते हुए धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलाने वाले संगठनों और उनके विचारों की निंदा की।
साथ ही लोगों से ऐसे संगठनों से सावधान रहने की अपील भी की। धरने में मौजूद प्रबुद्घजनों ने कहा कि मनुष्यता ही सभी धर्मों का मूल सिद्धांत है, लेकिन धर्मों की आड़ लेकर कई सारे संगठन अन्य समूहों की बुनियादी स्वतंत्रता का हनन करने पर आमादा हैं। इसी पृष्ठभूमि में देश के बहुत सारे साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और फिल्मकारों ने अपने सम्मान वापस किए हैं।
इन लोगों ने कहा कि व्यक्तिगत, राजनैतिक और सामाजिक जीवन में जातिवादी और धर्मोंवादी विचारों को बढ़ाना देश विरोध कृत्य है। इस अवसर पर साहित्यकार सुभाष पंत, जितेंद्र भारती, राकेश पंत, त्रेपन सिंह चौहान, राजेश सकलानी, जितेन ठाकुर, राजेंद्र गुप्ता, समर भंडारी, राजीव कोठारी, शिवप्रसाद जोशी, शालिनी जोशी आदि मौजूद रहे।