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उत्तराखंड को केंद्र का मिला दोहरा झटका 

Thu, 09 Jun 2016 01:35 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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बजट - फोटो : Demo Pic.
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राष्ट्रीय शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को दोहरा झटका दिया है। रमसा के 1736 शिक्षकों के वेतन में कटौती के बाद अब उन्नति प्रोजेक्ट में भी तीन की जगह दो माह का ही बजट जारी किया गया है। कम बजट के चलते शिक्षा विभाग ने अनुदेशकों के एक महीने के मानदेय के लिए प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों का पूरा वेतन केंद्र की ओर से वहन किया जाता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। वर्ष 2009-10 से शुरू हुई योजना में केंद्र ने शुरुआती कुछ वर्षों तक शिक्षकों के पूर्ण वेतन का भुगतान किया। लेकिन 2013-14 में केंद्र ने शिक्षकों के वेतन में कटौती कर दी।

इससे प्रदेश सरकार को शिक्षकों के शेष वेतन पर हर साल करोड़ों का अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक के वेतन पर लगभग 12 हजार और अध्यापकों के वेतन पर 11 हजार रुपये राज्य सरकार को वहन करना पड़ रहा है। जबकि, राज्य को दूसरा झटका अब उन्नति प्रोजेक्ट पर लगा है।
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केंद्र ने पिछले वर्ष उन्नति प्रोजेक्ट से हाथ खींचने के बाद इस साल बजट मंजूर किया है, लेकिन केंद्र से तीन महीने के बजाय दो महीने का ही बजट मिला है। इससे छात्र हित में चलाई गई योजना लटक गई है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 1115 स्कूलों में प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए विभाग की ओर से अब एक महीने के मानदेय के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।  

शिक्षकों का शेष वेतन राज्य कर रहा वहन
रमसा के स्कूलों में 279 प्रधानाध्यापक एवं 1457 अध्यापक कार्यरत हैं। केंद्र से एक प्रधानाध्यापक का वेतन 48150 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है, जबकि उनका वेतन है 60 हजार रुपये। इसी तरह अध्यापक का केंद्र से वेतन 48150 रुपये दिया जा रहा है और उनका वेतन है 50 हजार रुपये एवं इससे अधिक। ऐसे में अब शेष वेतन राज्य सरकार को वहन करना पड़ रहा है। केंद्र का कहना है कि वह केवल शिक्षकों का शुरूआती वेतन देगा।

दो महीने में अंग्रेजी के कोर्स को पूरा नहीं किया जा सकता, अभी स्टेट का बजट रुका है, केंद्र से यदि तीन महीने का बजट नहीं मिला तो एक महीने के बजट के लिए राज्य सरकार से इसके लिए कोशिश करेंगे।
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- डी सेंथिल पांडियन शिक्षा सचिव
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