वित्तीय संकट के मुहाने पर खड़े प्रदेश को बचाने के लिए राज्य सरकार अनुपूरक बजट लाने की तैयारी में जुट गई है।
अगर बजट पास नहीं हुआ तो जुलाई से प्रदेश में वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा। मामले में विधिक मशविरे के साथ सरकार ने अनुपूरक बजट तैयार करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद विधानसभा के सदन में अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया जा सकता है।
केंद्र सरकार का दिया त्रैमास बजट जून में समाप्त हो जाएगा। प्रदेश में सरकार होने की वजह से केंद्र से अब पैसा मिलने की उम्मीद नहीं है। विधानसभा के सदन में जो विनियोग बिल पास हुआ था वह उलझा हुआ है। केंद्र सरकार विनियोग बिल को पास नहीं मान रही है।
इस पर पेंच यह पैदा हो गया है कि जब सरकार को बहाल किया गया है तो विनियोग बिल को पास क्यों नहीं माना जा रहा? अगर विनियोग बिल पास नहीं हुआ है तो सरकार गिर गई। अगर सरकार गिर गई थी तो मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके मंत्रियों ने दुबारा शपथ क्यों नहीं ली?
इस संबंध में राजभवन भी विचार कर रहा है। कई बार की बैठकों के बाद विधानसभा सचिव से भी इस संबंध में नोट मांगा गया था। एक तरफ हाईकोर्ट के माध्यम से सरकार बजट की समस्या हल कराने की कोशिश कर रही है और दूसरी तरफ यह कहा जा रहा है कि राज्यपाल 40 हजार करोड़ रुपये के बजट से 13 हजार करोड़ रुपये घटाकर विनियोग बिल पास होने का आदेश कर सकते हैं।
इसके अलावा सरकार को अनुपूरक बजट का विकल्प विधि विशेषज्ञ सुझा रहे हैं। पुराने विनियोग बिल में संशोधन करके अनुपूरक बजट के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इस विकल्प पर तैयारी शुरू हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि सरकार अनुपूरक बजट प्रस्तुत कर सकती है।
विधानसभा में अनुपूरक बजट सामान्य तौर पर आता है। इसमें एक विभाग के पैसा खर्च न कर पाने तो दूसरे विभाग को ट्रांसफर करने आदि व्यवस्था की जाती है, लेकिन आम बजट की तरह इस बजट पर अधिक चर्चा नहीं होती है। हालांकि विपक्ष इस पर मत विभाजन के लिए कह सकता है। ताजा वित्तीय परिस्थिति में इस बार का अनुपूरक बजट विशेष रहेगा।