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मधुमिता हत्याकांड: मधुमिता की बहन ने दी धमकी, कहा अमरमणि की सजा कम हुई तो प्राण त्याग दूंगी

Sun, 03 Jun 2018 09:05 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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nidhi shukla - फोटो : amar ujala
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मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने कहा है कि यदि अमरमणि त्रिपाठी की सजा में कुछ भी कमी आई तो वह प्राण त्याग देंगी। उन्होंने यह बात शनिवार को प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही।

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उन्होंने कहा कि उनकी बहन की हत्या में उम्रकैद भुगत रहे अमरमणि ने 15 दिन पहले राज्यपाल उत्तराखंड से सजा माफी की अपील की थी। इसके विरोध में उन्होंने एक याचिका दायर कर अमरमणि की अपील खारिज करने की मांग की है। इसके साथ ही निधि शुक्ला ने हरिद्वार जेल प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से अमरमणि जेल में न होकर इलाज के नाम पर अपने गृह जनपद के एक मेडिकल कॉलेज में है। उन्होंने पुलिस उपमहानिरीक्षक (जेल) से  ल्द से जल्द अमरमणि को हरिद्वार जेल लाने की अपील की।

शनिवार को निधि शुक्ला अमरमणि त्रिपाठी की पुत्रवधु की मां सीमा सिंह के साथ देहरादून पहुंची थी। निधि शुक्ला ने कहा कि अमरमणि त्रिपाठी उनकी बहन की हत्या का द्रोषी होने के साथ ए ग्रेड का हिस्ट्रीशीटर भी है। उसके खिलाफ 33 आपराधिक मामले दर्ज हैं। मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उसे जिला न्यायालय देहरादून ने साल 2007 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उच्च न्यायालय नैनीताल और उच्चतम न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। अब अमरमणि त्रिपाठी ने राज्यपाल उत्तराखंड के यहां दया याचिका दायर की है। निधि शुक्ला ने कहा कि अपनी बहन को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ गंवा दिया है। ऐसे में अगर अमरमणि की सजा में कमी की जाती है तो यह फैसला सुनाने वाले के ‘दरवाजे’ पर आमरण अनशन कर प्राण त्याग देंगी। निधि ने बताया कि अमरमणि की दया याचिका के खिलाफ उन्होंने भी राज्यपाल उत्तराखंड के यहां याचिका दायर कर दी है।

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चार साल से गोरखपुर में क्यों है अमरमणि त्रिपाठी 

अमरमणि त्रिपाठी - फोटो : amar ujala
गौरतलब है कि अमरमणि त्रिपाठी चार साल पहले तक हरिद्वार जेल में बंद था। इसी दौरान उसने बीमारी का बहाना बनाया और गोरखपुर स्थित एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गया। पिछले चार सालों से वह मेडिकल कॉलेज में ही है। ऐसे में निधि ने हरिद्वार जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की मिलीभगत के चलते ही अमरमणि गोरखपुर में हैं। वह मेडिकल कॉलेज से ही आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है। 

ये है पूरा मामला 
बता दें कि नौ मई 2003 को कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या का आरोप यूपी के पूर्व विधायक और केबिनेट मंत्री अमरमणि त्रिपाठी पर था। मधुमिता की अपील पर मामला उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड ट्रांसफर कर दिया गया था। हत्याकांड के चार साल बाद 2007 में देहरादून सत्र एवं जिला न्यायालय ने अमरमणि को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद साल 2007 में उच्च न्यायालय नैनीताल और 2013 में उच्चतम न्यायालय दिल्ली ने इस सजा को बरकरार रखा था। अमरमणि को फैसले के बाद हरिद्वार जिला कारागार में रखा गया था। 

पूरे मामले का संज्ञान ले लिया गया है। इस संबंध में जांच कराई जा रही है कि अमरमणि त्रिपाठी इतने लंबे समय से जेल से बाहर होकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कैसे रह रहा है। जल्द ही उसे हरिद्वार जेल में लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
- पीवीके प्रसाद, आईजी जेल 
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