वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन एक्ट बनाया था, जिसके तहत बेनामी लेनदेन एक्ट 1988 में संशोधन कर इसे और मजबूत बनाया गया। एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन पर रोक है और बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।
क्या है बेनामी प्रॉपर्टी
जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदी गई होती है उसे बेनामदार कहा जाता है। बेनामी संपत्ति चल या अचल संपत्ति या वित्तीय दस्तावेजों के रूप में हो सकती है। कुछ लोग अपने काले धन का ऐसे निवेश करते हैं। सामान्य तौर पर इस तरह से अर्जित संपत्तियां बेनामदार के खुद के नाम पर न होकर किसी और के नाम होती हैं।
कितने साल की हो सकती है सजा
वर्ष 1988 के काननू संशोधन कर इस बात का प्रावधान किया गया कि केंद्र सरकार के पास ऐसी प्रॉपर्टी को जब्त करने का अधिकार है। बेनामी संपत्ति की लेनदेन के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है और प्रॉपर्टी की बाजार कीमत के एक चौथाई के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य में लाए जा रहे कानून में सजा के इन प्रावधानों को सख्त और प्रभावी बनाने की तैयारी है।