सतीश जोशी के मोबाइल फोन की घंटी बजी, उन्होंने हैलो के बजाए हरिओम कहा। फिर वह एक दुकान में गए उनको आटे की जरूरत थी। दुकानदार से पूछा गोधूम चूर्णम अस्ति।
दुकानदार समझा नहीं तो सतीश ने आटे के थैले पर अंगुली लगा दी। सतीश ने प्रण लिया है कि वह किसी भी दशा में संस्कृत के अलावा अन्य भाषा नहीं बोलेंगे। हालांकि इस वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका संस्कृत ज्ञान हैरत में डालने वाला है। उनके साथी मुकेश कोहली ने भी संस्कृत में पारंगत हासिल कर ली है। मुकेश ने पिथौरागढ़ कॉलेज से पहले बीएससी किया। बाद में उन्होंने एमए हिंदी में प्रवेश ले लिया। संस्कृत भारती के शिविरों में जाकर उनका भी संस्कृत के प्रति मोह जागा। अब यह 25 वर्षीय नौजवान धाराप्रवाह संस्कृत बोल लेता है।