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यूपी से मिलनी है दस हजार करोड़ की परिसंपत्ति

Tue, 03 Feb 2015 09:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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यूपी व उत्तराखंड के बीच बंटने वाली परिसंपत्तियों में 95 प्रतिशत सिंचाई विभाग की है। दोनों राज्यों के बीच सैकड़ों बैठकें, केंद्र का हस्तक्षेप, मुकदमेबाजी और दो बार दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद भी बहुत सफलता तो नहीं मिली लेकिन अब उम्मीद है कि गाड़ी जल्द ही पटरी पर आएगी।
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विगत एक दिसम्बर को देहरादून में हरीश रावत व यूपी के सीएम अखिलेश यादव के बीच और वर्ष 2010 में तत्कालीन सीएम रमेश पोखरियाल निशंक व यूपी की तत्कालीन सीएम मायावती के बीच लखनऊ में परिसंपत्तियों को लेकर बात हुई।

लेकिन अब तेजी से एक बार फिर बैठकों का सिलसिला सकारात्मक तरीकेसे शुरू हो गया है। परिसंपत्तियों के बंटवारे के तहत उत्तराखंड को हरिद्वार में 696 हेक्टेयर भूमि पिछले कुंभ मेला आयोजन के दौरान मिल गई थी, लेकिन अभी भी 13 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का हस्तांतरण होना है।
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जनपद हरिद्वार में 3321.495 हे., पौड़ी गढ़वाल में 119.030 हे., ऊधमसिंहनगर में 687.420 हेक्टेयर भूमि तो ऐसी है जिसे तत्काल हस्तांतरित किया जा सकता है। 41 ऐसी नहरों जो कि पूर्णत: उत्तराखंड में है लेकिन कब्जा यूपी का है और 28 ऐसी नहरें जो कि दोनों राज्यों में बहती है लेकिन इन पर भी यूपी का नियंत्रण है। 11 यूपी की नहरों पर उत्तराखंड का कब्जा है।
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उत्तराखंड में यूपी के स्वामित्व वाली सिंचाई विभाग की परिसंपत्ति
4200 करोड़ रुपए की 13116 हेक्टेयर भूमि
4000 करोड़ की कीमत के आधा दर्जन जलाशय
2035 आवासीय व 173 अनावसीय भवन, हरिद्वार, यूएसनगर व पौड़ी स्थित
192 किमी लंबी केनाल की भूमि
41 नहरें (28 हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में) पूर्णत: उत्तराखंड में है।
28 नहरें (10 नहरें हरिद्वार व 18 नहरें यूएसनगर में) दोनों प्रदेशों में बहती हैं, जिनपर यूपी का नियंत्रण है।
11 नहरें उत्तराखंड व यूपी में हैं जिन पर उत्तराखंड का नियंत्रण है।
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