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बाबा को लेकर उत्तराखंड में 'अनुलोम-विलोम'

Tue, 03 Feb 2015 04:51 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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योग गुरु कुछ भी कहें, इसके बावजूद कांग्रेस में भी उनके चाहने वालों की कमी नहीं है। देश में कांग्रेस को शीर्षासन कराने वाले बाबा को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस भी दो हिस्सों में बंटी है।
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एक धड़ा अनुलोम कर रहा है यानि उन्हें आत्मसात किए है तो दूसरा विलोम यानि उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। सरकार में बैठे एक पूर्व विधायक जिनका सिक्का चलता है वह बाबा को उड़ाकर केदारघाटी ले गए। बाबा लौटे और मीडिया के सामने तारीफों का च्यवनप्राश घोल सरकार में ऊर्जा भर दी।

जबकि पुराने मुख्यमंत्री ने बाबा के चुनावी बोल पर तमाम मामले खोल दिए थे। अब पार्टी के मुखिया कालाधन वापसी के नाम पर बाबा के बोल वचन याद दिला रहे हैं। बताते हैं कि कुछ नेता गुरु के बहाने खनक वाले चेले यानि जिनका सिक्का चलता है उनके रिश्तों को तोड़ इसे पार्टीलाइन से जोड़ रहे हैं।
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हुजूर की नजरों में खटक गई इमारत
सचिवालय के पास बड़ी इमारत में बड़े साहब बैठते हैं। इमारत के सामने एक बड़ी इमारत बनकर तैयार हो गई। बुलंद इरादों वाले साहब की नजर में यह इमारत खटक गई। इमारत दो साल से बन रही थी, अब बनकर तैयार हुई तो बड़े साहब की दाढ़ी में खुजली कर गई।

भवन स्वामी को संदेश भिजवाया कि इमारत वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है। दून के कप्तान से एक पत्र एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) को भिजवाकर आपत्ति जताई कि यहां बड़े हाकिम बैठते हैं। लिहाजा यहां यह इमारत ठीक नहीं है।

दून कप्तान भी भूल गए कि भवन स्वामी ने अग्निशमन से पहले ही एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) ले रखी है। एमडीडीए ने भवन स्वामी को नोटिस भेज दिया। एमडीडीए के बायलॉज में आईएमए, डीआरडीओ जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के अलावा किसी भी सरकारी संस्थान के नजदीक भवन गैरकानूनी नहीं है।

इसलिए भवन स्वामी को सिविल कोर्ट से एमडीडीए के आदेश के खिलाफ स्थगनादेश मिल गया। इसके बावजूद भवन स्वामी को आंखें दिखाकर काम बंद करा दिया गया है। अब बड़े साहब का कौन क्या करे, कागज पर तो कुछ है नहीं।

दिल्ली का मिशन दून में वेंटिलेटर पे
दिल्ली से मिला सेहत का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन देहरादून में बीमार पड़ा है। उसे वेंटिलेटर से उठाकर तंदरुस्त बनाने के लिए सियासत दां तो तैयार हैं लेकिन अफसरशाही उसका दम निकालने में जुटी हुई है।

एक बरस से कभी साहब तो कभी मैडम को कुर्सी पर बैठाया जा रहा है, लेकिन महानिदेशालय से चलने वाला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अब सचिवालय में कैद है। फाइलों को गाड़ियों में भरकर लाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो फाइलें लापता होने लगीं।

पहाड़ के लिए देहरादून में बनी योजनाओं पर दिल्ली की मुहर लगी, लेकिन अब उनको पहाड़ चढ़ाने में दम फूल गया है। बड़ी उम्मीद से नए साहब को कुर्सी पर बैठाया गया है पर उनके सीने में अधिकारों का वही दर्द उठने लगा है जिसके चलते पुराने साहब ने कुर्सी छोड़ दी थी।

अपनी ढपली-अपना राग
कांग्रेस की विचारधारा में पले बढ़े और डुबकी लगाने वाले पीडीएफ मंत्री अब कांग्रेस में मचे घमासान पर कहते हैं कि ये उनका (कांग्रेस) अपना मामला है इससे हमें क्या। जबकि अभी कुछ दिन पहले कांग्रेेस की चौखट तक जा पहुंचे थे और अंतिम समय पर दरवाजा नहीं खुला।

वे देश में कांग्रेस के गिरते ग्राफ और बड़े नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने से चिंतित हैं लेकिन उनका मानना है कि जनता आने वाले दिनों में उसी को चुनेगी जिसकी क्षेत्र की जनता पर व्यक्तिगत मजबूत पकड़ होगी। उनके इन विचारों से तो ऐसा ही लगता है कि आने वाले चुनाव में उनकी अपनी ढपली और अपना राग होगा।
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