महाकुंभ मेला 2021 के दौरान कोरोना जांच में हुए फर्जीवाड़े के गिरफ्तार किए गए डेलफिया लैब भिवानी के संचालक आशीष वशिष्ठ को पुलिस ने तीन दिन का रिमांड पूरा होने के बाद न्यायालय में पेश कर वापस जेल भेज दिया है। आरोपी की निशानदेही पर एसआईटी ने लैपटॉप और रजिस्टर बरामद किया है।
महाकुंभ मेला में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की कोरोना जांच के लिए मैक्स कॉरपोरेट सर्विस को ठेका दिया गया था। कंपनी के पार्टनर शरत व मल्लिका पंत ने आईसीएमआर के नियमों पर खरी न उतरने वाली भिवानी की एक छोटी लैब व नलवा लैब हिसार के बीच करार करा दिया था।
जिसके बाद फर्जी आंकड़े आईसीएमआर के पोर्टल पर अपलोड किए गए। इस मामले में जांच कर रही एसआईटी ने चार दिन पहले आरोपी भिवानी की डेलफिया लैब के संचालक आशीष वशिष्ठ को गिरफ्तार किया था।
जिसके बाद आरोपी को न्यायालय से रिमांड पर लेकर एसआईटी के जांच अधिकारी राजेश शाह भिवानी व हिसार में नलवा लैब पहुंचे। भिवानी पहुंचने के बाद आरोपी की निशानदेही पर रजिस्टर पर लैपटॉप बरामद किया गया।
इसके साथ ही नलवा लैब के संचालक डॉक्टर नवतेज नलवा व आरोपी का आमना-सामना भी कराना था। लेकिन डॉक्टर नलवा के हिसार में न होने के कारण एसआईटी की टीम को वापस आना पड़ा। जांच अधिकारी राजेश शाह ने बताया कि आरोपी का रिमांड पूरा होने के बाद उसे न्यायालय में पेश कर वापस जेल भेज दिया गया।
ऐसे हुआ था आरोपी व नलवा लैब के बीच करार
कोविड जांच में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही एसआईटी की टीम ने पहली गिरफ्तारी कर ली है। पकड़े गए आरोपी आशीष वशिष्ठ ने बताया कि उसकी लैब आईसीएमआर में पंजीकृत नहीं थी। लिहाजा मैक्स कॉरपोरेट सर्विस के पार्टनर शरत और मल्लिका पंत ने उसका करार नवला लैब से कराया था। इसके बाद श्रद्धालुओं की जांच करने के लिए उसने भिवानी, हरियाणा और हरिद्वार के जगजीतपुर की एक संस्था से कोरोना जांच के लिए कर्मचारी रखे थे।