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'सेक्स पावर' के लिए माफिया ने बनाया पहाड़ पर 'क्लब'

Thu, 10 Jul 2014 10:13 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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कीड़ा जड़ी (यारसा गंबू) के लिए माफिया ने उत्तराखंड के बुग्यालों पर शिकंजा कस लिया है। छिपला केदार, नासामर्ती, क्वारी, आली के आसपास के ग्रामीण गांव छोड़ चुके हैं।
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तीन माह से टेंट लगाकर कीड़ा जड़ी जमा कर रहे हैं। आलम यह है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत समझे जाने वाले बुग्यालों में जेनरेटर चल रहे हैं। डिश एंटीना लगे हैं। शराब और गुटखे का सेवन किया जा रहा है।

हरियाणा से पहुंची शराब खच्चरों से ढोई जा रही है। कीड़ा जड़ी के नाम पर पर्वतीय प्रदेश की अस्मिता से हो रहे इस खिलवाड़ का खुलासा किया पांगू-अस्कोट-आराकोट यात्रा दल के सदस्यों ने।
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दोहन की कोई नीति नहीं

25 मई को पिथौरागढ़ से शुरू होकर 8 जुलाई को उत्तरकाशी के आराकोट में 45 दिन की यात्रा पूरी कर यह दल बीते मंगलवार लौटा है।

दल के सदस्यों ने बुधवार को पत्रकारों को यात्रा की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि देश में शक्तिवर्धक जड़ी यारसागंबू के दोहन की कोई नीति नहीं है, जबकि नेपाल और भूटान इस संबंध में सिस्टम डेवलप कर चुके हैं।

वन विभाग को राजस्व की हानि हो रही है और सरकार सो रही है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं।

15 लाख में एक किलो

तिब्बत के तकलाकोट, ल्हासा और टेंच्यू के साथ ही चीन के बीजिंग समेत तमाम शहरों में क्लब और शोरूम में यारसागंबू की खुली बिक्री होती है। यह काफी महंगी बिकती है।

लोग शौकिया तौर पर इसके रस को बियर और जूस में मिलाकर पीते हैं। इसके लालच में तस्करों ने उच्च हिमालयी क्षेत्र को अपना अड्डा बना लिया है।

यात्रा के दल के सदस्यों ने बताया कि कीड़ा जड़ी की सप्लाई चीन और नेपाल में उत्तराखंड से है। यह जड़ी एक किलो 15 लाख रुपये में बिकती है।

बताया कि नेपाल में यारसागंबू पर प्रतिबंध नहीं है। वहां दस प्रतिशत रायल्टी सरकारी खजाने में जमा करनी होती है। कीड़ा जड़ी का नेपाल में इतना बड़ा कारोबार है कि वहां के लोग यहां से हेलीकाप्टर से यारसागंबू बिक्री के लिए ले जाते हैं।
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यह है कीड़ा जड़ी

- यारसागंबू एक तरह का फफूंद है, जो सेक्स पावर बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाता है। जंतु विज्ञानी इसे कारडिसेप्स साइनेंनसिक नाम से पुकारते हैं।
-तिब्बत में इसे जाड़े का कीड़ा भी कहा जाता है। फेफड़े की कार्य प्रणाली बेहतर करने के साथ ही शुक्राणु जनित रोगों के लिए भी यह फायदेमंद है।
-यह जड़ी 3200 से लेकर 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है। यह फंगस लारवा पर परजीवी के रूप में संक्त्रस्मण करता है। इसकी लंबाई सात से 10 सेंटीमीटर तक होती है।
-कीड़ा जड़ी में बिटामिन बी-12, मेनोटाल, कार्डिसेपिक अम्ल, इर्गोस्टाल के साथ-साथ 25 से 32 प्रतिशत तक कार्डोसेपिन, डीपाक्सीनोपिन भी होता है।
-यौन दुर्बलता दूर करने के साथ ही गठिया और वात रोग में भी यह कारगर है।
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