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आम बजट से दून को है ये उम्मीदें

Thu, 10 Jul 2014 09:23 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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आम बजट आज (10 जुलाई) पेश होने जा रहा है। हर वर्ग की निगाह वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे पर लगी है। अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाए जाने की आड़ में महंगाई का डोज आम आदमी पहले ही ले चुका। अब उसे आम बजट से अच्छे दिन की आस है।
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उन अच्छे दिनों की जिनके नारे पर सवार हो भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराज सके। अलग-अलग वर्गों ने वित्त मंत्री के पिटारे से कुछ खास की आस लगाई है। कुछ यूं हिलोरें मार रहीं इनकी उम्मीदें।
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यह है युवाओं की आशा

मोबाइल, इलेक्ट्रानिक गैजेट्स सस्ते हों।
दुपहिया वाहनों को सस्ता किया जाए।
रोजगार की घोषणा, स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाएं।
ब्रांडेड, रेडिमेड कपडों को सस्ता किया जाए।

यह है नौकरीपेशा की उम्मीद-
आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर ढाई लाख की जाए।
छोटे चौपहिया वाहनों को और सस्ता किया जाए।
पेट्रोल, डीजल को सस्ता किया जाए।
जीवनरक्षक दवाओं को सस्ता किया जाए।

महिलाओं की उम्मीद

रसोई गैस को सस्ता किया जाए।
रेस्टोरेंट में खाने-पीने को भी छूट के दायरे में लाएं।
किचन से जुड़े दालें, मसाले भी सस्ते किए जाएं।
महिला आयकर दाताओं के लिए छूट को और बढ़ाएं।

उद्योगपति/व्यवसायियों चाहें कुछ ऐसा-
ज्वेलर्स के लिए कस्टम ड्यूटी में कमी की घोषणा हो।
विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल सस्ता किया जाए।
व्यवसाय के लोन पर ब्याज दरें घटें, प्रक्रिया आसान हो।
लघु, मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावे की बात हो।
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यह बोले

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण हो। एसएमई सेक्टर के लिए सरकार कुछ करे, क्योंकि इसी में सर्वाधिक रोजगार सृजित होता है। इकोनामिक ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप पर भी ध्यान दे सरकार।
--पंकज गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड

आयकर में नौकरीपेशा महिलाओं को छूट मिलनी चाहिए। उनका स्लैब बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा महंगाई पर कंट्रोल पर सरकार का फोकस होना चाहिए।  
--डा. ऋचा, नौकरीपेशा

युवाओं को सस्ते कपड़े, जूते, गैजेट्स तो चाहिए ही, इसके अलावा रोजगार एक बड़ा मुद्दा है। युवाओं को इसके लिए तैयार किए जाने संबंधी केंद्रों की घोषणा हो।  
--गिरीश, छात्र, एसजीआरआरआईटीएस

कस्टम ड्यूटी एक अहम मुद्दा है। इसमें छूट मिलनी चाहिए। पिछले बजट में इसे बढ़ाया गया था। इस वक्त इसकी दर 10 प्रतिशत है। इसमें कमी होगी तो व्यवसाय को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
--प्रवीण जैन, अध्यक्ष, सराफा मंडल, देहरादून
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