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जानते हैं, हिमालय की गोद में है 'सेक्स पावर' का भंडार

Fri, 12 Jun 2015 12:44 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
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हिमालयी क्षेत्र में जिस जड़ी की मांग सबसे ज्यादा है, वह यारसागंबू (कीड़ाजड़ी) है। यौनवर्धक दवाएं बनाने में काम आने वाली इस जड़ी कीदेशी, विदेशी बाजार में भारी मांग के चलते अच्छे दाम मिलते हैं।
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यही यही वजह है कि अबकी भी दो महीने तक अपना घरबार छोड़ लोग कीड़ाजड़ी की खोज में निकल गए हैं, इसमें जोखिम भी कम नहीं हैं। यह लोग हिमस्खलन की चपेट में आने के अंदेशे के बीच जान पर खेल यारसागंबू की खुदाई में जुटे हैं।

इन दिनों बोना, गोल्फा, तोमिक, नाथिंग, टांगा आदि गांवों के 150 परिवार पंचाचूली पर्वतमाला के पास स्थित कुल्कू नामक स्थान पर जड़ी की खोज में जुटे हैं। यह स्थान मुनस्यारी मुख्यालय से 65 किलोमीटर, जबकि बोना गांव से 30 किलोमीटर की दूरी पर है।
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लोग जड़ी खोदने के लिए मई माह की शुरुआत मेंघर से निकल जाते हैं और बरसात शुरू होते ही वापस लौटने लगते हैं। इन गांवों के साथ ही नागनीधूरा, राजरंभा, रालम, पोटिंग, ल्वा, गोरीपार आदि के तकरीबन 1200 परिवार कीड़ाजड़ी निकालने का काम कर रहे हैं।  

पापड़ी ग्राम पंचायत के निवासी मंदीप सिंह पांगती कुछ दिन पहले कुल्कू से लौटे हैं। वह बताते हैं कि जड़ी खोदने वाले लोग एक महीने का राशन वहां पहुंचा देते हैं। एक परिवार 1000 से 1200 जड़ी तक यानि आधा किलो के करीब जड़ी खोद लेता है। बर्फ पिघलने पर जड़ी मिलती जाती है।
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10 लाख रुपए किलो बिकी कीड़ा जड़ी

इस बार बर्फ ज्यादा है, बर्फ पिघली नहीं है। लिहाजा, कीड़ाजड़ी कम निकल रही है। इन गांवों के लोगों को कीड़ाजड़ी निकालने की अनुमति है। प्रति व्यक्ति कीड़ाजड़ी की 500 रुपए की रॉयल्टी वन पंचायत में जमा की जाती है।

बाहर से ठेकेदार आकर कीड़ाजड़ी खरीद ले जाते हैं। पिछले साल 10 लाख रुपए किलो कीड़ा जड़ी बिकी थी। बहुत लोगों की जड़ी खरीददार न मिलने से नहीं बिकी थी।

बस चार माह रहती है सुरक्षित
कीड़ाजड़ी महज चार महीने तक ही सुरक्षित रहती है। उसके बाद इसमें कीड़े पड़ जाते हैं। यह काली पड़ जाती है।

पढ़ाई छोड़ निकल जाते हैं जड़ी खोदने
यारसागंबू जड़ी खोदने का ऐसा क्रेज हैं कि बच्चे पढ़ाई छोड़ जड़ी निकालने चल देते हैं। कीड़ाजड़ी निकालकर जब लौटते हैं तो स्कूल में मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करा देते हैं।

दोहन की स्पष्ट नीति नहीं
यारसागंबू दोहन की स्पष्ट नीति नहीं है। सरकार ने कीड़ाजड़ी निकालने का अधिकार तो वन पंचायतों को दे दिया है, लेकिन बेचने की कोई नीति नहीं है। लोग जब कीड़ाजड़ी बेचने निकलते हैं तो पुलिस पकड़ लेती है। राज्य सरकार ने कीड़ाजड़ी दोहन की नीति बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इस मामले में कुछ हुआ नहीं।
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