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'किंग ऑफ कालागढ़’ की दबंगई से सहमे हैं बाघ

Tue, 21 Jan 2014 10:31 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के कार्बेट और लैंसडोन वनक्षेत्रों में एक युवा बाघ ने बड़े क्षेत्र में अपना साम्राज्य कायम कर लिया है। पांच अन्य नर बाघों के होते हुए भी इसने अपना दबदबा बनाया हुआ है।
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रौबदार व्यवहार से वन्यजीव विशेषज्ञ हैरान
सामान्य से अधिक हट्टे-कट्टे दिख रहे करीब छह साल के इस बाघ के रौबदार व्यवहार से वन्यजीव विशेषज्ञ हैरान हैं। आमतौर पर किसी बाघ के साम्राज्य में दूसरा बाघ नहीं फटकता है, लेकिन इस ‘दबंग’ की धमक कार्बेट के कालागढ़ से लेकर लैंसडोन तक देखी गई है।

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वन्यजीव विशेषज्ञ ने इसे ‘किंग ऑफ कालागढ़’ की संज्ञा दी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की कैमरा ट्रैपिंग में कालागढ़ और लैंसडोन वनक्षेत्रों में सात मादा, छह नर बाघ (उम्र चार से आठ साल) और चार शावक पाए गए हैं।
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इसी दौरान युवा बाघ के दूसरे बाघों के साम्राज्य में प्रभुत्व जमाने की पुष्टि हुई है। फिंगर प्रिंट की तरह हर बाघ के शरीर की धारियां भिन्न होती हैं। इसी के आधार पर बाघों की गणना हो रही है।

कहां से कहां तक साम्राज्य
यह बाघ पहले कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन के अधनाला और प्लेन रेंज में नजर आता था, लेकिन  कुछ समय से यह कालागढ़ से लगते रिजर्व फॉरेस्ट के लैंसडोन वन प्रभाग के कोटड़ी और दुगड्डा रेंज में भी नजर आ रहा है।

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इसका मूवमेंट इतना तगड़ा है कि यह कब कालागढ़ से लैंसडोन और लैंसडोन से कालागढ़ पहुंच जाए। इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

बाघ के इलाके में दूसरा कोई नहीं फटकता
बाघ को जंगल का राजा कहते हैं। जंगल के लगभग 60 से 80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में नर बाघ की सत्ता चलती है। इलाके की सभी मादाओं पर उसका ही अधिकार होता है, लेकिन बाघ की सामान्य आदतों से इतर छह साल के युवा बाघ ने अपनी सत्ता दूसरों पर स्थापित कर रखी है।

रिजर्व फॉरेस्ट में बाघों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं
टाइगर रिजर्व के बाघों की सुरक्षा पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं, लेकिन रिजर्व फारेस्ट के बाघों की सुरक्षा पर एक पाई भी खर्च नहीं की जाती।

इसका लाभ उठाकर शिकारी ऐसे बाघों की हत्या कर देते हैं। इस बाघ के मूवमेंट से साफ है कि रिजर्व फॉरेस्ट के बाघों की सुरक्षा व्यवस्था भी चौकस करने की दरकार है।

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पिछले दो माह के कैमरा ट्रैपिंग में एक ही बाघ का मूवमेंट कार्बेट के कालागढ़ से लेकर लैंसडोन तक नजर आया है। इस बाघ को ‘किंग आफ कालागढ़’ का नाम दिया गया है। दूसरे बाघ इससे लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे, यह भी एक अध्ययन का विषय है। करीब 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में राज करने वाले इस बाघ की खूबियों का अध्ययन किया जाएगा।
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- विभाष पांडव, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान
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