मंगलवार को राज्य निर्माण के दौरान हुए खटीमा और मसूरी गोलीकांड को 20 साल पूरे हो गए। इस मौके पर पूरे उत्तराखंड में श्रद्वांजलि दी गई।
श्रद्वांजलि सभा का आयोजन किया
सोमवार को शहीदों को श्रद्वांजलि देने के लिए राजीव गांधी पंचायत राज संगठन उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीन जोशी ने श्रद्वांजलि सभा का आयोजन किया।
बंसत बिहार में 20वीं शहादत दिवस पर कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीन जोशी ने कहा कि इस राज्य को बनने में शहीदों के दिए गए बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
वही संगठन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश चंद पांडे ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि शहीदों के त्याग और बलिदान को यह राज्य हमेशा याद रखेगा।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों को श्रदांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेत्री नजमा खान, कमलेश तनेजा, विकास लवानिया, पियूष कुमार, वीके शर्मा, विजेंद्र चौधरी, रोजी सिंह, गिरजा शंकर आदि लोग मौजूद थे।
जरा याद करो कुर्बानी...
- दो सितंबर 1994 को झूलाघर के हाल में अनशन पर बैठे पांच आंदोलनकारियों को जबरन उठाया गया।
- पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल संग वरिष्ठ आंदोलनकारी प्रदर्शन के लिए पौड़ी गए थे।
- शहर में महिलाएं, बुजुर्ग और दूसरी पंक्ति के आंदोलनकारी ही मौजूद थे।
- सुबह नौ बजे महिलाएं, युवा, बुजुर्ग जुलूस की शक्ल में आगे बढ़े, 47 को गिरफ्तार किया गया।
- सुबह साढ़े नौ से दस के बीच पुलिस-पीएसी ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, राय सिंह बंगारी, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, मदनमोहन ममगाईं, बलवीर नेगी, धनपत सिंह शहीद हुए।
- जवानों को रोक रहे डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी भी पीएसी की गोलियों का शिकार बन शहीद हो गए।