केंद्र के लोकपाल विधेयक को हूबहू लागू कर प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के कांग्रेस सरकार के दावे से पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी सहमत नहीं हैं।
खंडूडी का कहना है कि यह राज्य सरकार का अधिकार है कि नए सिरे से लोकायुक्त बिल पास करे लेकिन केंद्र का बिल उनके लोकायुक्त के मुकाबले कारगर नहीं हैं। लोकायुक्त बिल को राजनीतिक मजबूरी मानकर लागू करने के बजाए उसके अधिक प्रभावी बनाने पर खंडूड़ी ने जोर दिया है।
नया लोकायुक्त कमजोर
पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने केंद्र का बिल लागू करने पर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र के बिल को संसद में भाजपा का समर्थन मिला और बाहर से अन्ना ने उसे अपनी सहमति जताई, लेकिन दोनों ही पक्षों ने इसे एक शुरूआत भर बताते हुए भविष्य में इसमें कई सुधार किये जाने की बात कही है।
केंद्र ने जो बिल तैयार किया है वह उनकी जरूरत के अनुरूप हो सकता है लेकिन प्रदेश यह उत्तराखंड में प्रभावी नहीं हो सकता। राज्य सरकार जो कार्य कर रही है उसके राजनीतिक कारण हैं जबकि हमने सशक्त और कड़े लोकायुक्त के अलावा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सेवा का अधिकार और स्थानांतरण एक्ट बनाया था, जिसे कांग्रेस सरकार लागू नहीं करना चाहती है।
खंडूड़ी का लोकायुक्त
भाजपा जिस लोकायुक्त बिल को लेकर आई थी उसमें केंद्र के मुकाबले कहीं सख्त प्रावधान हैं। खंडूड़ी ने बताया कि लोकायुक्त एक व्यवस्था है जिसमें कम से कम राजनीतिक दखल होना चाहिए। जिसके लिए हमने केवल मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को पैनल में रखा था।
खंडूड़ी ने कहा कि हमारे बिल में लोकायुक्त को भ्रष्टाचार के किसी भी वाद को 6 माह के भीतर और संगीन मामलों को एक बरस के भीतर निस्तारित करने की व्यवस्था थी जो केंद्र के बिल में नहीं है। हमनें फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की थी जो केंद्र के बिल में नहीं है।