जोरदार बारिश से गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग शुरुआती पांच किमी तक तीन
स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जिसके चलते केदारनाथ की पैदल
यात्रा नहीं चल पा रही है।
उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी के बीच रविवार का दिन आशंका और सतर्कता में बीता। शनिवार रात की गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग तीन स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके चलते रविवार को केदारनाथ की पैदल यात्रा नहीं चल पाई।
उधर, सोमवार की सुबह भी केदारनाथ यात्रा शुरू नहीं हो पाई। सोमवार को केदार घाटी में आसमान में बादल छाए रहे। रविवार को दर्शन कर पैदल मार्ग से लौट रहे 378 यात्रियों को पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने सुरक्षित गौरीकुंड व सोनप्रयाग तक पहुंचाया। चेतावनी के मद्देनजर शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। स्थिति पर निगाह रखी जा रही है।
केदारनाथ पैदल रास्ते की मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मजदूर, पुलिस और एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे। स्थितियां विकट होने के कारण चीरबासा में शाम तक बमुश्किल जाने लायक रास्ता बन सका। लेकिन देर शाम पहाड़ी से मलबा आने के कारण मार्ग फिर बंद हो गया। जंगलचट्टी और भीमबली के पास दो जगह रास्ता बंद है।
रविवार को दिन में तीन बजे के बाद से पैदल मार्ग वाले इलाके में फिर बारिश होती रही। ऐसे में मौसम ठीक रहा तभी पैदल मार्ग सोमवार को खुल पाएगा और यात्रा चल पाएगी। इससे पहले भी 25 जून से 01 जुलाई तक खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के चलते केदारनाथ यात्रा बंद रही।
बद्रीनाथ और हेमकुंड साहेब की यात्रा सोमवार को जारी रही। हालांकि भारी बारिश के अलर्ट से यात्रा धीमी पड़ी है। बद्रीनाथ में सोमवार को बद्रीनाथ दर्शन के लिए 220 यात्री पहुंचे। हेमकुंड की यात्रा के लिए गोविन्द घाट से 88 यात्रियों का जत्था घांघरिया के लिए रवाना हुआ। चमोली के डीएम अशोक कुमार ने बताया के यात्रियों को बारिश होने पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की गयी है। दोनों धामों की यात्रा सुचारू है।
बदरीनाथ की यात्रा रविवार को भी चलती रही लेकिन पूरी सतर्कता बरती गई। बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा के प्रमुख पड़ाव जोशीमठ पहुंचकर चमोली के डीएम अशोक कुमार ने यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वे अगले तीन दिनों तक जोशीमठ में ही कैंप करेंगे।