भगवान केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति पूजा-अर्चना के पश्चात शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हो गई है। शीतकाल के छह माह भोले बाबा के दर्शन और पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होंगी।
यहां बता दे कि 25 अक्तूबर को मध्य हिमालय में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के बाद छह माह के लिए बंद कर दिए गए थे।
रामपुर और गुप्तकाशी में प्रवास के बाद बाबा की डोली ने छह कुमाऊं रेजीमेंट की बैंड की टुकड़ी के साथ सोमवार सुबह विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से प्रस्थान किया। सेमी, भैंसारी, विद्यापीठ होते हुए बाबा की डोली पूर्वाह्न 11 बजे जैबरी तोक के ऊपर बगड़वालधार पहुंची। यहां पहले से मौजूद भक्तों और जीआईसी ऊखीमठ के छात्र-छात्राओं ने अक्षत और पुष्पवर्षा कर डोली का स्वागत किया।
बाबा के जयकारों के साथ 11.20 बजे डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
मुख्य पुजारी ने बाबा की आरती उतारी
मंदिर की परिक्रमा करने के पश्चात ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग और केदारनाथ के मुख्य पुजारी टी गंगाधर लिंग ने बाबा की आरती उतारी।
इसके पश्चात डोली को गद्दीस्थल में विराजमान किया गया। रावल भीमाशंकर लिंग ने डोली में लगा स्वर्ण मुकुट धारण किया। पूजा के बाद बाबा की मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया।
इस मौके पर आचार्य हर्ष जमलोकी द्वारा वेद मंत्रोच्चारण किया गया। पंथेर, पुरोहित प्रियधर जमलोकी व कैलाश जमलोकी ने भगवान केदार का जलाभिषेक किया गया। इस जल को प्रसाद रूप में भक्तों में वितरित किया गया।
इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक शैला रानी रावत, ब्लाक प्रमुख संत लाल, नगर पंचायत अध्यक्ष रीता पुष्पवाण, ज्येष्ठ उप प्रमुख विष्णुकांत शुक्ला, एसडीएम यूएस चौहान, तहसीलदार एसपी उनियाल, एसओ जयपाल नेगी, मोहन प्रसाद सती, विश्व मोहन जमलोकी, यशोधर मैठाणी और डोली प्रभारी राजकुमार नौटियाल आदि मौजूद थे।