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केदारनाथ आपदा 2013: आज भी हरे हैं उस काली रात के जख्म, जरा सी बारिश से भी सहम जाते हैं लोग

Tue, 16 Jun 2020 01:30 AM IST
अलका त्यागी जयबीर मनराल, अमर उजाला, नारायणबगड़(चमोली)  
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- फोटो : फाइल फोटो
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16/17 जून, 2013 को केदारनाथ धाम से होते हुए नारायणबगड़ क्षेत्र में आई आपदा के जख्म सात साल बाद भी हरे हैं। बाढ़ सुरक्षा के नाम पर पिंडर नदी के दोनों किनारों पर होने वाले कार्य आधे अधूरे हैं। ऐसे में नारायणबगड़ बाजार पर खतरा बना हुआ है। जरा सी बारिश आने पर आज भी लोग सहम जाते हैं।

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आपदा के वक्त पिंडर नदी के जलप्रलय से नारायणबगड़ पुल, पुराना बाजार, थरालीबगड़ में जीत सिंह मार्केट की दुकानों समेत 60 से ज्यादा दुकान और 25 से अधिक मकान पिंडर नदी में समा गए थे। नदी पर बना झूलापुल और बीएसएनएल टावर भी आपदा की भेंट चढ़ गया था।


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नौ करोड़ की लागत से नए झूलापुल का निर्माण तो किया गया, लेकिन इस पुल से लोगों की आवाजाही को अब तक संपर्क मार्गों का निर्माण नहीं हो सका।

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वहीं, बाढ़ सुरक्षा के नाम पर पिंडर नदी के बहाव और कटाव को रोकने के लिए दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया गया, लेकिन जीत सिंह मार्केट और मुख्य बाजार के बीच लगभग 700 मीटर कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। 

वह भी तब, जबकि विधानसभा उपचुनाव के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने इसका स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ सुरक्षा के कार्य जल्द शुरू करने का भरोसा दिलाया था। ब्लॉक प्रमुख यशपाल सिंह नेगी, देवराज रावत, पूर्व जिपं सदस्य गणेश शाह, सुरेंद्र धनेत्रा, व्यापार संघ अध्यक्ष जयबीर कंडारी ने कहा कि जब भी आपदा की याद जहन में आती है तो उनकी रूह कांप जाती है। 
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