आपदा के डेढ़ वर्ष बाद भी रुद्रप्रयाग में खतरा बरकरार है। यहां सुमाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं हो पाए हैं। मंदाकिनी नदी किनारे बसे इस कस्बे में आपदा से टूटे कई भवन आज भी खतरे का सबब बने हुए हैं।
जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी की दूरी पर स्थित सुमाड़ी में आपदा में बीस से अधिक आवासीय और व्यापारिक भवन मंदाकिनी नदी में बह गए थे। यह क्षेत्र अब भी संवदेनशील बना हुआ है। यहां बाढ़ सुरक्षा के लिए नदी किनारे सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है, जबकि नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है।
ऐसे में बरसात में नदी का पानी ऊपरी जमीन को अपने आगोश में ले सकता है जिससे कई अन्य आवासीय मकान भी ढह सकते हैं। आपदा प्रभावित किशन सिंह, जसपाल सिंह, राम प्रसाद बडोनी, सतीश सकलानी, बृजमोहन आदि ने बताया कि नदी के बहाव से पूरा क्षेत्र खतरे की जद में है। आपदा में क्षतिग्रस्त कई भवन अब भी जस के तस हैं।
अधिक बारिश में भूस्खलन का खतरा
यही स्थिति तिलवाड़ा में भी बनी है। लखपत बुटोला, बीरेंद्र बुटोला, सुरेश गोदियाल, महावीर सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा बनाई जा रही सुरक्षा दीवार से नदी का बहाव कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन अधिक बारिश में भूस्खलन से खतरे का अंदेशा है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग, निर्माण खंड रुद्रप्रयाग के ईई एसके बसिलियाल ने बताया कि सुमाड़ी-तिलवाड़ा में मंदाकिनी नदी किनारे सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य चल रहा है। मानसून से पूर्व निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा।
केदारनाथ में किया भवनों का निरीक्षण
केदारनाथ में 8 भवन स्वामियों ने आपदा से क्षतिग्रस्त अपने भवनों का निरीक्षण किया। रविवार को फाटा पटवारी के साथ भवन स्वामी राकेश तिवारी, एसपी शुक्ला, पुरुषोत्तम तिवारी, विश्वनाथ, एसी शुक्ला, एमएम बगवाड़ी, किशन बगवाड़ी और भगत प्रसाद बगवाड़ी ने अपने भवनों का जायजा लिया और निम के देवेंद्र सिंह बिष्ट की मौजूदगी में भवनों के अंदर पड़ी सामग्री को भी सुरक्षित किया गया।
विदित हो कि बीते मार्च माह के पहले सप्ताह में भी लोक निर्माण विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के साथ कई भवन स्वामियों ने धाम पहुंचकर अपने भवनों का जायजा लेते हुए नापजोख कराई थी। इन भवन स्वामियों के साथ प्रशासनिक स्तर पर अनुबंध के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके बाद इन जर्जर हो चुके भवनों को तोड़ा जाएगा।