इसलिए हो रहा विरोध
केदारनाथ सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी के अनुसार, 22 अप्रैल को प्रशासन ने बिना विश्वास में लिए केदारनाथ में उनके आवासीय भवनों के आगे गड्ढे किए, जिससे भवनों को खतरा बना है। साथ ही मंदिर मार्ग पर जहां-तहां खुदाई की गई है, जिससे यात्रा में कारोबार होना संभव नहीं है। प्रशासन द्वारा पूर्व में भी जबरन नोटिस भेजने और भवनों को अधिग्रहित किया गया। जिसे लेकर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत केदारनाथ बंद किया गया।
प्रसाद के बिना ही लौटे श्रद्धालु
शुक्रवार को बाबा केदार की यात्रा के शुभारंभ पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। इस दौरान सुबह छह से सात बजे तक प्रसाद की दो, तीन दुकानें खुली, लेकिन कपाट खुलने के बाद हक-हकूकधारियों और तीर्थपुरोहितों के आह्वान पर सभी दुकानें बंद कर दी गईं, जिसके बाद श्रद्धालु प्रसाद खरीदे बगैर ही लौटने को मजबूर रहे।