इसके बाद परंपरानुसार बाबा केदार की मूर्ति को मंदिर परिसर में भक्तों के दर्शनार्थ रखा जाएगा। यहां पर अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए प्रशासन व बीकेटीसी के अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर चॉबी उपजिलाधिकारी ऊखीमठ गोपाल सिंह चौहान को सौंप दी जाएगी।
बाबा केदार की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा कर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीष देते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। 10 नवंबर को डोली रामपुर से प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुचेंगी।
यहां पर बाबा केदार की डोली के आगमन पर एक दिवसीय मेला भी आयोजित होगा। 11 नवंबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति अपने शीतकालीन पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। मंदिर के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि कपाट बंद होने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। साथ ही शीतकालीन गद्दी स्थल पर भी सभी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।