-छात्रों को द्वितीय वर्ष नहीं, बल्कि प्रथम वर्ष से ही अस्पताल में काम करने का मौका मिलेगा।
-चिकित्सकों को कहीं भी इलाज के दौरान भाषा की अड़चन न आए, इसके लिए विशेष फाउंडेशन कोर्स कराया जाएगा।
-पहली बार एमबीबीएस में वैकल्पिक विषय की शुरुआत होने जा रही है। छात्र अपनी पसंद के हिसाब से विषय चुन सकते हैं।
-सीखने के उद्देश्य से छात्रों के लिए दो मॉडल लांच किए जाएंगे।
-नया पाठ्यक्रम, सीखने पर केंद्रित होने के साथ-साथ ही रोगी केंद्रित, लिंग संवेदनशील, परिणाम उन्मुख और पर्यावरण के लिए उपायुक्त होगा।