न दुकान बची, न सामान। नजरों के सामने पानी ने सारी मेहनत को तबाह कर दिया। किसी तरह जान बचा ली, लेकिन अब परिवार को पालने की चिंता है।
आपदा के कारण अपना सब कुछ गवां बैठे
उधार का सामान लेकर बड़ी उम्मीद के साथ देहरादून आए हैं, कुछ कमाई हो तो आपदा में डूबे अरमानों को जीने का हौसला मिल सके। यह दर्द बयां किया श्रीनगर के मीर जलालुद्दीन ने। वह अपने बेटे मीर नासिर हुसैन के साथ नार्दर्न इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में पहुंचे हैं।
परेड ग्राउंड में ट्रेड फेयर के दूसरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते नासिर हुसैन से ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि दूनवासियों के लिए वे हरी प्याज के डिजाइन की लद्दाखी पैनल शॉल, जामा आउट लाइन, फ्लावर डिजाइन, कायोस वर्क, आरी वर्क के शॉल, स्टोल और सूट लाए हैं।
बताया कि उनके पास स्टोल के 102, शॉल के 95 और सूट के 32 डिजाइन हैं। आपदा के कारण अपना सब कुछ गवां बैठे नासिर और उनके पिता जलालुद्दीन करीब 12 लाख का माल उधार पर लाए हैं।
नासिर ने बताया कि श्रीनगर के सबसे मुख्य बाजार डलगेट में उनकी दुकान है, मगर बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। इससे उनको 40 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
परिवार को खाने के लाले तक पड़ गए थे, मगर हाथ फैलाना मंजूर नहीं था। इसलिए किसी तरह माल उधार लिया। बताया कि परिवार में छह लोग हैं। इस मेले से सभी को उम्मीदें लगी हैं।
पानी उतरने के साथ ढह रही दुकानें
नासिर ने बताया कि श्रीनगर में करीब 1000 दुकानें हैंडी क्राफ्ट से संबंधित हैं, जिनसे करीब दो लाख लोग की रोजी जुड़ी है। मगर सब तबाह हो गया, अब पानी उतरने के बाद तो दुकानें भी गिरने लगी हैं। उनकी मानें तो आपदा ने श्रीनगर के व्यवसाय को 20 साल पीछे धकेल दिया है।
कारोबार पर 70 फीसदी असर पड़ा
अनंतनाग से आए बसीर अहमद और हैदर अली बताते हैं कि शॉल, सूट, स्टोल आदि श्रीनगर से आता है। मगर आपदा के कारण इस बार कारोबार पर 70 फीसदी तक असर पड़ा है।
कहा कि अधिकतर माल अनंतनाग से ही लेकर आए हैं। बीते साल मेले में 30 दुकानें थी, लेकिन इस बार 8-10 दुकानें ही लग सकी हैं। आधे व्यापारी आए ही नहीं।