करीब तीन माह चली कैलास मानसरोवर यात्रा का समापन हो गया है। 12 जून से शुरू हुई यात्रा का 18वां और अंतिम दल यात्रा पूरी कर मंगलवार को दोपहर काठगोदाम स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम पहुंचा।
दल के जनसंपर्क अधिकारी आईटीबीपी में डीआईजी हरियाणा के राममहर सिंह ने बताया कि 46 सदस्यीय दल में 35 पुरुष और 11 महिलाएं थीं। निगम प्रबंधन ने यात्रियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कुछ देर विश्राम के बाद यात्री दिल्ली रवाना हो गए।
लगातार बदल रहे मौसम से इस वर्ष केएमवीएन और विदेश मंत्रालय के लिए यात्रा कराना किसी चुनौती से कम नहीं था। खराब मौसम के चलते शुरुआत में दलों में कटौती की आशंका थी। 12 जून से शुरू हुई यात्रा में कुल 18 दल में 783 यात्रियों ने यात्रा की। पहले दल में बीमारी से एक महिला यात्री की मौत भी हुई। सबसे अधिक महाराष्ट्र के 128 यात्रियों ने यात्रा की।
उत्तराखंड से भी 22 यात्री शामिल रहे। पिछले वर्ष 910 यात्रियों ने इसमें हिस्सा लिया था। आपदा के कारण 2013 की रद्द हुई यात्रा के यात्रियों को भी इसमें शामिल किया गया था। यात्रा के लिए इस वर्ष लगभग 2600 आवेदन विदेश मंत्रालय के पास पहुंचे थे, इसमें से स्वास्थ्य परीक्षण के बाद 783 यात्री ही शामिल हो सके।
जीएम जीएस मर्तोलिया ने बताया कि सभी कर्मचारियों ने लगन से काम किया है, उन्हें इसके लिए पुरस्कृत किया जाएगा। यात्रियों से जो सुझाव मिले हैं, उन पर गौर किया जाएगा, ताकि यात्रा को और अधिक बेहतर बनाया जाएगा। यात्रा को सकुशल बनाने में विदेश मंत्रालय और आईटीबीपी का भी विशेष सहयोग रहा।