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पीड़िता के 'फर्जी' अकाउंट में सफेदपोश

Tue, 03 Dec 2013 04:43 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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जेपी जोशी यौन उत्पीड़न मामले में हर रोज चौकाने वाली बातें सामने आ रही है। पता लगा है कि किसी ने युवती का फेक फेसबुक एकाउंट भी बनाया था।
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इस एकाउंट में कई सफेदपोश और नौकरशाह फ्रेंड लिस्ट में हैं। पुलिस और खुफिया विभाग इस पर नजर रख रही है। भले ही पुलिस एक टीम के जांच में जुटे होने का दावा कर रही है।

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मामला हाईप्रोफाइल होने की वजह से पुलिस और खुफिया एजंसियों की अलग-अलग टीमें गोपनीय स्तर पर युवती की गतिविधियों की पल-पल जानकारी जुटा रही हैं।

पता लगा है कि युवती के फेक फेसबुक एकाउंट पर कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ है। पुलिस ने ऐसे करीब दो दर्जन से अधिक नामों की सूची भी तैयार की है। केस के सिलसिले में पुलिस उनसे पूछताछ भी कर सकती है।
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सुरक्षा चाहती है पीड़िता
यौन उत्पीड़न के आरोपी जेपी जोशी से खतरे की आशंका पर पीड़िता सुरक्षा चाहती है। पीड़िता अधिवक्ता के जरिए राष्ट्रीय महिला आयोग और सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाने की तैयारी में है। खुफिया एजंसियों के हवाले से ऐसी जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता ने दिल्ली में अधिवक्ता से इस बारे में मशविरा कर रही है।

कांग्रेस के विजिटिंग कार्ड भी छपाए थे
पीड़ित महिला के नाम से जिला कांग्रेस की महिला पदाधिकारी के विजिटिंग कार्ड भी छपाए गए थे। कांग्रेस नेता रितु कंडियाल का दावा है कि वह लोगों को विजिटिंग कार्ड भी दिखाती थी। लेकिन कांग्रेस ने ऐसी किसी महिला के पार्टी पदाधिकारी होने से इनकार किया है।

रितु कंडियाल ने आरोपों को नकारा
कांग्रेस नेता रितु कंडियाल ने खुद पर लगे आरोपों को नकारा है। दुबई में मौजूद रितु ने अमर उजाला को बताया कि जोशी जी को खुश रखने वाली बात निराधार है।

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न मुझे सीडी का पता है और न ही उनके रिलेशन का। युवती ने कभी भी मुझे जोशी से रिश्ते की बात नहीं बताई। मुझे तो इस बात का पता 16 नवंबर को लगा। रितु का कहना है कि 23 अक्तूबर 2012 के बाद युवती से उसकी मुलाकात 28 अक्तूबर 2013 को हुई।

हर माह वीक-एंड पर नैनीताल आते थे जोशी!
यौन शोषण के आरोपों में फंसे अपर सचिव जेपी जोशी को लेकर आजकल नैनीताल और हल्द्वानी में खूब चर्चाएं हो रही हैं। दबी जुबान से लोग उनकी कहानियां कहने लगे हैं। जिससे उनके बारे में कई बातें सामने आ रही हैं।

जोशी यहां अक्सर वीकएंड (शनिवार और रविवार) पर आते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अपर सचिव जोशी हर माह सरकारी काम से नैनीताल आते थे और झील के किनारे स्थित कुछ चुनिंदा होटलों में ही ठहरते थे।

कई बार उनसे मिलने रात में कोई और भी आता था। उनके लिए वहां ‘खाने-पीने’ की सारी व्यवस्थाएं पुलिस विभाग की ओर से की जाती थी। अगर होटल नहीं मिल पाता था तो उन्हें पुलिस लाइन के गेस्ट हाउस में ठहराया जाता था।
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उसमें भी खाने-पीने से लेकर ठहरने तक की सारी व्यवस्थाएं पुलिस ही करती थी। इन सभी जगहों पर मामले की जांच को नैनीताल पहुंची टीम ने दो दिनों तक पड़ताल और संबंधित लोगों से पूछताछ की। कई जगहों पर पिछले कुछ महीनों में उनके नाम पर रूम बुक थे।

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