हाइड्रोलॉजिकल स्थिति ने क्षेत्र को स्थिर करने में की मदद
अध्ययन में परियोजना के निर्माण की शुरुआत से 10 साल पहले और पावर स्टेशन की वर्तमान स्थिति तक भूस्खलन की स्थिति पर मैप तैयार किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर मामलों में परियोजना के निर्माण से पहले देखे गए भूस्खलन क्षेत्र की तुलना में बाद में भूस्खलन क्षेत्र में काफी कमी आई है। अध्ययन से पता चला है कि जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास भूस्खलन गतिविधियां परियोजना की निर्माण गतिविधि से संबंधित नहीं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्राप्त आंकड़ों से ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकांश मामलों में, जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण और संबंधित गतिविधियों और कमीशनिंग के बाद की हाइड्रोलॉजिकल स्थिति ने क्षेत्र को स्थिर करने में मदद की होगी।
ये भी पढ़ें...Dehradun: भूकंप के लिहाज से संवेदनशील दून में पहली बार मास्टर प्लान में चिन्हित की गई भूकंप रेखा, ये है तैयारी
इसके अलावा, जलविद्युत परियोजनाओं का आकार, जलाशय का आकार, स्थानीय भूविज्ञान, मिट्टी और भूमि कवर की स्थिति (विशेष रूप से वनस्पति कवर) परियोजना क्षेत्रों में भूस्खलन को कम करने के लिए कुछ ढलान स्थिरीकरण भूमिका निभाते हैं। यह रिपोर्ट पीटीआई के हवाले से जारी की गई है।