अपर सचिव यौन शोषण से जुड़े प्रकरण में ब्लैकमेलिंग के आरोपी संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया की गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार उन्हें अदालत में पेश किया गया। जिसे अदालत ने सात दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जिसकी जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
रिंकी साहनी की अदालत में पेश
पुलिस ने अभियुक्त संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया को ठीक पौने तीन बजे न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रिंकी साहनी की अदालत में पेश किया। अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस ने जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, वे धाराएं नहीं बनती।
प्रमोशन की बात
एफआईआर में भी अभियुक्त का नाम नहीं है, पुलिस ने सेक्शन पढ़ने तक की जरूरत नहीं समझी, अभियोजन बताए कि ये धाराएं कैसे लगाई गई। अपर सचिव जेपी जोशी और संयुक्त सचिव के बीच जिस प्रमोशन की बात की जा रही है, संयुक्त सचिव से पहले तीन अन्य अधिकारी हैं, अभियुक्त का वर्ष 2016 से पहले प्रमोशन का कोई प्राविधान ही नही है।
सचिवालय में मंत्री, विधायक व पार्टी के लोगों के साथ कई लोग आते हैं। जिनसे केवल बातचीत के आधार पर किसी को अभियुक्त नहीं बनाया जा सका।
अभियुक्त शासन में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत है एवं पूर्व में सचिवालय संघ का अध्यक्ष रहा है। अभियोजन पक्ष ने बचाव पक्ष के तर्कों का विरोध किया। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी जेएस बिष्ट ने कहा कि छह दिसंबर को वल्दिया की संलिप्ता के संबंध में कोई तथ्य प्रकाश में आया।
सीडी बनवाई
विवेचना हुई तो पाया गया कि सह अभियुक्तगण को उत्प्रेरित कर आपराधिक षडयंत्र रचकर वादी की एक सीडी बनवाई। सह अभियुक्त नीरज चौहान ने भी पुलिस रिमांड में दिए बयानों में स्वीकारा की पीड़िता व अमित गर्ग के साथ जब वह 20 अक्तूबर वर्ष 2013 को नैनीताल गया था।
रास्ते में पीड़िता के मोबाइल पर अभियुक्त वल्दिया का फोन आया था। जिससे उसकी जान पहचान रितु कंडियाल ने कराई थी। प्रमोशन के लिए जेपी जोशी और अभियुक्त वल्दिया के बीच खीचतान थी। पीडिता अभियुक्त वल्दिया के माध्यम से अपर सचिव जेपी जोशी से समझौते की बात करती थी। अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।