जिंदगी की जद्दोजहद से परेशान होकर ग्राम पंचायत मैठाणा के एक विकलांग युवक ने कीटनाशक खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी।
मृत हालत में मिला
जन्म से ही पोलियोग्रस्त उत्तराखंड के गोपेश्वर (मैठाणा गांव) निवासी संतोष (35) के कमरे का जब बुधवार सुबह दरवाजा नहीं खुला तो उसकी मां सुभागा देवी ने आस-पड़ोस के ग्रामीणों को दरवाजा न खुलने की बात कही। ग्रामीणों द्वारा दरवाजा तोड़ा गया। कमरे में जाकर देखा तो संतोष मृत हालत में मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि संतोष अपनी विकलांगता के बावजूद भी पढ़ाई में अव्वल था। उसने अपने मनोबल के बूते बीए की डिग्री और कंप्यूटर डिप्लोमा लिया था। उसने कई विभागों में नौकरियों के लिए आवेदन भी किए। लेकिन मायूसी ही हाथ लगी। थर-हारकर संतोष ने मंगलवार रात्रि को मौत को गले लगा लिया।
पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया
बुधवार को जिला चिकित्सालय में पोस्ट मार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। ग्रामीण दुर्गा प्रसाद मैठाणी का कहना है कि संतोष दोनों पांवों से विकलांग होने के बावजूद भी पढ़ाई के लिए प्रतिदिन मैठाणा से गोपेश्वर करीब 15 किमी की दूरी तय करता था।
प्रत्येक विभागों में विकलांग कोटे की नौकरी दिए जाने की मांग करता रहा। लेकिन अधिकारियों की संवेदनहीनता ने उसे हताश कर दिया था।