फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीजीपी ने छीन ली अपने कप्तानों की शक्ति

Wed, 27 Nov 2013 04:52 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड के डीजीपी ने कप्तानों के अधिकारों में कटौती और अपने में इजाफा करने का फैसला लिया। शायद यह देश का पहला राज्य होगा जहां पर डीजीपी सीधे सर्किल में सीओ की नियुक्ति करेगा।
विज्ञापन


इसके लिए आठ महत्वपूर्ण सर्किल भी सलेक्ट किए गए।

एडिशनल एसपी को दे दिया ये अधिकार
इसके अलावा सर्किल में सीओ की पोस्टिंग का अधिकार कप्तान से लेकर डीआईजी को और चौकी इंचार्ज की तैनाती का अधिकार एडिशनल एसपी को दे दिया गया।

पढ़ें, दोनों सहेलियों में था इंतहा प्यार इसलिए छोड़ा ‘घरबार’

इसके पीछे थानों में मुकदमे दर्ज नहीं होना वजह बताई गई है। मंगलवार को पीएचक्यू में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान डीजीपी बीएस सिद्धू ने पीईसी (पुलिस अधिष्ठान कमेटी) की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश पुलिस में सुपरवाइरी अथॉरिटी (डीआईजी, एडिशनल एसपी व सीओ) के पास अधिकार नहीं हैं। कई मामले में ऐसे सामने आए जब थानाध्यक्ष ने अपने डिप्टी या एडिशनल एसपी का आदेश नहीं माना। इसलिए सभी को अधिकार दिया गया।
विज्ञापन


डीजीपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर 600 मुकदमे दर्ज किए। मतलब साफ है कि यदि पुलिस मुकदमे दर्ज करती तो लोगों को कोर्ट ना जाना पड़ता। लेकिन नई व्यवस्था में हर पीड़ित व्यक्ति की तहरीर पर मुकदमा कायम हो जाएगा इसकी क्या गारंटी होगी, इसका संतोषजनक जवाब डीजीपी के पास नहीं था।

ये हैं फैसले
- पुलिस सर्किल हरिद्वार सदर, रुड़की, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, कोटद्वार, देहरादून की नगर व सदर में अब सीओ की तैनाती सीधे पीएचक्यू से होगी। अभी तक यह अधिकार जिला पुलिस कप्तान के पास था।

- शेष सर्किलों में किसी भी जिले में सीओ की तैनाती करने से पहले डीआईजी का अनुमोदन लेना होगा। अभी तक स्वतंत्र रूप से यह अधिकार जिले केएसएसपी एसपी के पास था। यदि इस मुद्दे पर डीआईजी व पुलिस कप्तान के बीच सहमति नहीं बनेगी तो आईजी लॉ एंड ऑर्डर अंतिम निर्णय लेंगे।

पढ़ें, ‘वो रामदेव कौन थे, जिनका मंत्री अभिनंदन करते थे’

- एडिशनल एसपी अपने अधिकार क्षेत्र में चौकी इंचार्ज की नियुक्ति व हैड कास्टेबल, कांस्टेबल का ट्रांसफर कर सकेगा। अभी तक यह अधिकार जिले के कप्तान के पास था।

- एडिशनल एसपी अपने क्षेत्र के किसी भी थाने से मुकदमे की विवेचना को अन्य थाने में ट्रांसफर कर सकेगा।

ये था माजरा
भाजपा नेता व जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुवीर सिंह नेगी ने आरटीआई के तहत जो जानकारी प्राप्त की, उसी आधार पर डीजीपी बीएस सिद्धू ने आधार बनाया। नेगी ने डीजीपी से मिलकर एक ज्ञापन भी सौंपा था।

आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक वर्ष में कोर्ट के आदेश पर पूरे राज्य में लगभग 600 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें सर्वाधिक 280 मुकदमे यूएसनगर में दर्ज हुए। इसके बाद 230 हरिद्वार में और लगभग 60 देहरादून में दर्ज कराए गए।

इनके अलावा यदि थानावार देखें तो कोतवाली काशीपुर में 105, रानीपुर में 43, ज्वालापुर में 38, बाजपुर में 36, पथरी में 32, किच्छा में 27, गदरपुर में 20 मुकदमे कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए।
विज्ञापन


फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें---
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें