दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि बच्चों को वर्चुअल दुनिया से बाहर निकालकर रचनात्मक लेखन और सृजन से जोड़ना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही चाहते हैं कि बच्चों को जड़ से जोड़कर जगत से परिचित कराया जाए।
प्रो. डंगवाल शुक्रवार को नगर निगम टाउन हाल में धाद संस्था की ओर से फूलदेई पर्व के समापन समारोह में बोल रही थीं। उन्होंने बच्चों के रचनात्मक विकास के लिए धाद के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ज्यादा से ज्यादा होने चाहिए, ताकि बच्चों को उनके लोक पर्व और संस्कृति की जानकारी भी मिल सके। कहा कि वर्तमान समय में बच्चे मोबाइल की दुनिया तक ही सीमित हैं और जो स्क्रीन पर उन्हें दिख रहा, उस पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे, जबकि बच्चों के रचनात्मक विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें कमरे से बाहर निकाला जाए, उनमें पढ़ने की आदत विकसित की जाए। इस मौके पर कोना कक्षा कार्यक्रम के संयोजक गणेश चंद्र उनियाल ने रिपोर्ट पेश की। कार्यक्रम का विचार पक्ष रखते हुए तन्मय ममगाईं ने कहा कि कोना कक्षा का धाद की गतिविधि से आगे बढ़कर समाज की गतिविधि बने यही वास्तविक लक्ष्य है।
सुनील भट्ट ने कहा कि बच्चों तक उत्तम किताबें पहुंचाना उनका लक्ष्य है। कहा कि पब्लिक स्कूल में वे बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें उनके माता-पिता पढ़ना चाहते हैं और सरकारी स्कूल में वे बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें सरकार पढ़ाना चाहती है। अगर ये सरकारी स्कूल न हों, तो इनमें पढ़ने वालों में से अधिकतर बच्चे अनपढ़ रह जाएं। धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि संस्था राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों के लिए समर्पित है। समाज में एक शक्ति अंतरनिहित होती है, जो अक्सर सुप्त होती है। समाज की इस शक्ति को जगाने जी जरूरत होती है। यदि हम इस शक्ति को जगाते हैं और रचनात्मक उपयोग करते हैं तो यह सामाजिक शक्ति बड़ी ताकत या मूवमेंट का रूप ले लेती है। इससे बड़े काम किए जा सकते हैं। लोक गायक प्रो. राकेश भट्ट ने फूलदेई से संबंधित लोकगीत गाकर पर्व का महत्व बताया।
इस मौके पर धाद की ओर से कई स्कूलों के बच्चों की ओर से बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई और चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। बिमल रतूड़ी, मंजू काला, विमल रतूड़ी, पूनम भटनागर, मनीषा ममगाईं, प्रीति तोमर, राजीव पांथरी, प्रेम बहुखंडी, जयदीप सकलानी, दीपक मैठाणी आदि ने विचार रखे। संचालन मीनाक्षी जुयाल ने किया। इस मौके हरि सिंह चौधरी, राजीव पांथरी, प्रभाकर देवरानी, मीना जोशी, बृजमोहन उनियाल, ज्योति जोशी, अवनीश उनियाल, मंजू काला, सुषमा असवाल, बीना कंडारी, डॉ. जयंत नवानी, कल्पना बहुगुणा, पूनम नैथानी आदि मौजूद रहे।